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रेलवे में डिजिटल बदलाव: अब टिकट चेकिंग स्टाफ की उपस्थिति होगी बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज

On: Tuesday, September 2, 2025 5:02 PM

न्यूज डेस्क| भारतीय रेलवे ने अपने टिकट जांच कर्मचारियों (टीटीई) के लिए उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब टीटीई कर्मचारी बायोमेट्रिक साइन-ऑन और साइन-ऑफ प्रणाली के जरिए अपनी ड्यूटी की शुरुआत और समाप्ति दर्ज करेंगे। यह पहल रेलवे संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, 29 अगस्त 2025 को पूर्व मध्य रेलवे के पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन पर पहली डिजिटल टीटीई लॉबी का उद्घाटन किया गया। इसके बाद इस प्रणाली को कई अन्य मंडलों में भी लागू किया जा चुका है, जिनमें उत्तर रेलवे का बनारस मंडल, पूर्व मध्य रेलवे का सोनपुर मंडल, पश्चिम रेलवे का रतलाम मंडल, मध्य रेलवे के सीएसएमटी, पुणे और सोलापुर, पूर्व रेलवे का मालदा मंडल, दक्षिण पश्चिम रेलवे का मैसूर मंडल, पश्चिम मध्य रेलवे का भोपाल मंडल, दक्षिण रेलवे के मदुरै, पालघाट, त्रिची और कोटा मंडल शामिल हैं। उत्तर मध्य रेलवे, पूर्वोत्तर रेलवे और उत्तर पश्चिम रेलवे जोन में भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जबकि उत्तर रेलवे का जम्मू मंडल जल्द ही इस सूची में शामिल होगा।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम

नई बायोमेट्रिक प्रणाली टिकट परीक्षक लॉबी सिस्टम के साथ एकीकृत की गई है। कर्मचारी आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण का उपयोग करके अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह से छेड़छाड़-रहित, पारदर्शी और गोपनीयता-अनुपालन होगी, जिससे वास्तविक समय में ड्यूटी स्टेटस और कार्य घंटों का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रणाली से कई बड़े फायदे होंगे:

  • सटीक उपस्थिति: अब उपस्थिति रिकॉर्ड पूरी तरह सत्यापन योग्य और सटीक होंगे।
  • रीयल-टाइम डेटा: कर्मचारियों की उपलब्धता और ड्यूटी की स्थिति का रीयल-टाइम में पता चलेगा, जिससे संचालन में तेजी आएगी।
  • उन्नत निगरानी: लॉबी संचालन और कार्य घंटों की बेहतर मॉनिटरिंग हो सकेगी।
  • सुव्यवस्थित तैनाती: यह प्रणाली हैंड-हेल्ड टर्मिनलों (एचएचटी) और ड्यूटी रोस्टर से एकीकृत होगी, जिससे कर्मचारियों की तैनाती अधिक कुशल तरीके से की जा सकेगी।

रेलवे का मानना है कि यह तकनीक न केवल कर्मचारियों की कार्यकुशलता और पारदर्शिता को बढ़ाएगी, बल्कि यात्रियों के लिए भी सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाएगी।

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