
पटना। बिहार में रोजगार और चयन के बावजूद अपनी बारी का इंतजार कर रहे युवाओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। बेल्ट्रॉन (BELTRON) डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) परीक्षा-2024 को सफलतापूर्वक पास कर चुके हजारों सफल अभ्यर्थी लंबे समय से लंबित अपनी प्रतिनियुक्ति (जॉइनिंग) को लेकर भारी असमंजस और चिंता में हैं। इस गतिरोध को तोड़ने और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए राज्यभर के अभ्यर्थियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
बिहार के विभिन्न जिलों से भारी संख्या में सफल अभ्यर्थी आज राजधानी पटना पहुंच रहे हैं, जहां वे अपनी मांगों को लेकर सीधे माननीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री से मुलाकात करेंगे और एक प्रतिनिधिमंडल के जरिए उन्हें अपना मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपेंगे।
विधानसभा के आंकड़ों से बढ़ा असमंजस
अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार विधानसभा में पूछे गए एक तारांकित प्रश्न (संख्या: 18/2/103) के सरकारी जवाब में यह बताया गया था कि लगभग 5000 अभ्यर्थियों की प्रतिनियुक्ति की जा चुकी है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद शेष बचे सफल अभ्यर्थियों में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब परीक्षा और चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सफल रही है, तो बचे हुए युवाओं की जॉइनिंग में इतनी देरी क्यों की जा रही है?
प्रतिनिधिमंडल की 4 सूत्रीय प्रमुख मांगें:
पटना पहुंचे अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने मुख्य रूप से चार मांगें रखी हैं:
- शीघ्र प्रतिनियुक्ति: सभी सफल और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों की जॉइनिंग प्रक्रिया को बिना किसी देरी के तुरंत शुरू किया जाए।
- पारदर्शिता की मांग: विभागों में उपलब्ध डाटा एंट्री ऑपरेटरों के रिक्त पदों का पूरा और पारदर्शी विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- समय-सीमा (Timeline) तय हो: पूरी प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया को कब तक पूरा किया जाएगा, इसकी एक निश्चित समय-सीमा घोषित हो।
- भविष्य की सुरक्षा: सफल छात्रों के भविष्य से जुड़ी मानसिक और सामाजिक अनिश्चितता को अविलंब समाप्त किया जाए।
“परीक्षा पास, परिणाम जारी – फिर भी प्रतिनियुक्ति क्यों है जारी?”
आंदोलन की रूपरेखा को लेकर अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि उनका यह प्रयास पूरी तरह से लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक है। वे अपनी बात एक अनुशासित तरीके से सरकार के समक्ष रखना चाहते हैं। अभ्यर्थियों ने अपनी इस व्यवस्था पर तंज कसते हुए कुछ नारे भी बुलंद किए हैं, जैसे— “न्याय नहीं, तो जवाब दो – सफल अभ्यर्थियों को अधिकार दो।”
युवाओं को पूरा भरोसा है कि माननीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री महोदय उनकी इस गंभीर समस्या को संवेदनशीलता से सुनेंगे और हजारों परिवारों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही कोई ठोस और सकारात्मक कदम उठाएंगे।
अब देखना यह होगा कि सरकार और विभाग की तरफ से इन युवाओं को क्या ठोस आश्वासन मिलता है।







