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ट्रेनें बनीं अपराधियों का अड्डा: जून में डीडीयू-धनबाद मंडल में चोरी-छिनतई की मानो बाढ़ आई, प्रीमियम ट्रेनों में भी यात्री असुरक्षित

On: Wednesday, July 1, 2026 4:28 PM

स्लीपर से 3AC तक में घुसे चोर, मोबाइल-पर्स उड़ाए, RPF-GRP की सुरक्षा पर उठे सवाल, यात्रियों की बेफिक्री भी बनी मुसीबत

देवब्रत मंडल | गया

ट्रेन का सफर अब आरामदायक नहीं, खौफ का सबब बनता जा रहा है। जून महीने में यात्रियों के साथ हुई आपराधिक घटनाओं की लंबी फेहरिस्त ने रेलवे सुरक्षा बल RPF और राजकीय रेल पुलिस GRP दोनों की नींद उड़ा दी है।

आधिकारिक सूत्रों की मानें तो DDU और धनबाद रेल मंडल में जून के दौरान चोरी-छिनतई की एक दर्जन से ज्यादा वारदातें दर्ज हुई हैं। चिंता की बात ये है कि हमसफर, दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों के AC कोच तक में यात्री सुरक्षित नहीं हैं।
जून में अलग-अलग ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों के मोबाइल फोन, पर्स, लेडीज बैग और कीमती सामान चोरी होने की शिकायतें लगातार सामने आई हैं। कई मामलों में चलती ट्रेन में यात्रियों के साथ छिनतई की वारदात भी हुई। स्लीपर कोच से लेकर 2AC और 3AC तक, अपराधियों ने किसी को नहीं बख्शा। एक ट्रेन में तो महिला यात्री के पर्स से महंगे मोबाइल सेट तक उड़ा लिए गए।

क्या-क्या हुआ शिकार

जून में अलग-अलग ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों के मोबाइल फोन, पर्स, लेडीज बैग और कीमती सामान चोरी होने की शिकायतें लगातार सामने आई हैं। कई मामलों में चलती ट्रेन में यात्रियों के साथ छिनतई की वारदात भी हुई। स्लीपर कोच से लेकर 2AC और 3AC तक, अपराधियों ने किसी को नहीं बख्शा। एक ट्रेन में तो महिला यात्री के पर्स से महंगे मोबाइल सेट तक उड़ा लिए गए।

यात्रियों की बेफिक्री या सिस्टम की नाकामी?

जांच में सामने आया है कि ट्रेन में सफर के दौरान यात्री अक्सर लापरवाह हो जाते हैं। मोबाइल चार्जिंग पर लगाकर सो जाना, पर्स सिरहाने रखकर नींद ले लेना, गेट के पास बैग छोड़ देना… यही बेफिक्री अपराधियों के लिए सुनहरा मौका बन जाती है।

लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि यात्री इस भरोसे के साथ ट्रेन में चढ़ते हैं कि RPF-GRP चप्पे-चप्पे पर तैनात है। जब प्रीमियम ट्रेनों के रिजर्व कोच में भी चोरी-छिनतई हो रही है तो सुरक्षा बलों की सक्रियता पर सवाल उठना लाजमी है।
DDU और धनबाद रेल मंडल में जून में दर्जनों शिकायतें दर्ज हुई हैं। हर FIR के बाद RPF और GRP थानों के पदाधिकारियों की परेशानी बढ़ जाती है। केस सॉल्व करना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि ट्रेन चलती-फिरती घटनास्थल है। अपराधी वारदात को अंजाम देकर अगले स्टेशन पर उतर जाते हैं और पुलिस के हाथ खाली रह जाते हैं।

चलती ट्रेन, उड़नछू अपराधी

DDU और धनबाद रेल मंडल में जून में दर्जनों शिकायतें दर्ज हुई हैं। हर FIR के बाद RPF और GRP थानों के पदाधिकारियों की परेशानी बढ़ जाती है। केस सॉल्व करना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि ट्रेन चलती-फिरती घटनास्थल है। अपराधी वारदात को अंजाम देकर अगले स्टेशन पर उतर जाते हैं और पुलिस के हाथ खाली रह जाते हैं।

रेलवे की अपील: सतर्क रहें यात्री

रेल मंत्रालय ने यात्रियों से अपील की है कि सफर के दौरान किसी भी परेशानी पर 139 पर कॉल कर या रेल मदद ऐप पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। ट्रेन में मौजूद RPF, GRP जवान या TTE को भी तुरंत सूचना दें।

लेकिन बड़ा सवाल अब भी बरकरार है- जब ट्रेन और प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा के इतने इंतजाम हैं, तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे? क्या सिर्फ यात्रियों को सतर्क रहने की नसीहत देकर रेलवे अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है?

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