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जिस टूटी झोपड़ी में भीगती रही मां की लाश, उसी खंडहर में अब बनेगा ‘महल’; बिहार के नवादा की इस झकझोर देने वाली खबर के पीछे की पूरी कहानी

On: Monday, June 8, 2026 1:24 PM

रिपोर्ट: दीपक कुमार

नवादा (बिहार): आधुनिक भारत और डिजिटल इंडिया के दावों के बीच बिहार के नवादा से एक ऐसी झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया है। नवादा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 37 स्थित जलालपुर गांव में पिछले हफ्ते एक बेबस मां ने अपनी ममता को अनाथ छोड़ दिया। गरीबी और भुखमरी से जूझते हुए 3 बच्चों की मां सोनमंती देवी इस दुनिया से विदा हो गईं। लेकिन इस घनघोर अंधेरे के बीच मानवता का एक ऐसा सवेरा हुआ, जिसने साबित कर दिया कि “जिसका कोई नहीं, उसका खुदा होता है।”

साड़ी के आंचल से ढकी झोपड़ी और भूख से थमी सांसें

खंडहर बन चुके मिट्टी के घर और साड़ी से ढकी झोपड़ी

जलालपुर गांव की रहने वाली सोनमंती देवी के पति फेंकू राजवंशी की पांच साल पहले एक ट्रेन हादसे में मौत हो गई थी। पति के जाने के बाद सोनमंती के कंधों पर तीन मासूम बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। रहने के नाम पर मिट्टी का एक जर्जर खंडहर था, जिसमें लगी झोपड़ी की दीवारें बांस की नहीं, बल्कि पुरानी साड़ियों से ढकी थीं। यह आशियाना न धूप रोक पाता था, न ठंड और न ही बारिश।
पड़ोसियों के रहमों-करम पर जब कभी कुछ खाने को मिल जाता, तो मां अपने कलेजे के टुकड़ों का पेट भरती। कई रातें ऐसी भी गुजरीं जब इस पूरे परिवार ने सिर्फ पानी पीकर भूख को सुलाया। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार सोनमंती देवी कुछ दिनों से बीमार थी उसे न तो भरपेट भोजन मिल प रहा था न इलाज आखिरकार, 29 मई को भुखमरी और गरीबी से लड़ते-लड़ते सोनमंती देवी की सांसें टूट गईं। विडंबना देखिए, जिस दिन मौत हुई, उस दिन आसमान से भी पानी बरस रहा था और बेबस मां की लाश झोपड़ी के भीतर भीगती रही।

मुकेश यादव , सामाजिक कार्यकर्ता

इस दर्दनाक घटना की जानकारी जब स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश यादव को हुई, तो उन्होंने नवादा के जिलाधिकारी (DM) और आला अधिकारियों तक गुहार लगाई। सोशल मीडिया पर जब एक स्थानीय पत्रकार ने इस खबर को फ्लैश किया, तो यह तेजी से वायरल हो गई। हर कोई हैरान था कि आज के दौर में भी कोई भूख से मर सकता है। मुकेश यादव ने बताया कि कुंभकर्णी नींद में सोए प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा इस झोपड़ी तक झांकने तक नहीं पहुंचा।

संकटमोचक बने संत रामपाल जी महाराज, अनाथ बच्चों को मिला नया जीवन

कहते हैं जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तो कुदरत अपना रास्ता बनाती है। जैसे ही इस बेबसी की खबर संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों के जरिए उन तक पहुंची, उन्होंने तुरंत अपनी विश्वव्यापी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत बच्चों की मदद का आदेश जारी कर दिया।
शनिवार, 6 जून को (घटना के ठीक नौवें दिन) जलालपुर गांव ने एक ऐसा दृश्य देखा जिसने सबकी आंखों में आंसू ला दिए। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी अपने कंधों और सिर पर राहत सामग्री की भारी खेप लेकर उस टूटी झोपड़ी पर पहुंच गए।
मदद की सामग्री में क्या-क्या शामिल था:

मदद में दी गई सामग्री और साथ में तीनों अनाथ बच्चे
  • पूरे महीने का राशन: बच्चों के लिए भोजन की पूरी व्यवस्था।
  • दैनिक जरूरतें: बेड, गद्दे, तकिए, कपड़े, साबुन और वाशिंग पाउडर।
  • बच्चों का भविष्य: सभी बच्चों के लिए दो-दो जोड़ी स्कूल ड्रेस, जूते और मोजे।
  • घरेलू आराम: घर में पहनने के कपड़े और तपती गर्मी से राहत के लिए एक बड़ा स्टैंड फैन। बड़ा सा ड्रम इत्यादि अनेको जरूरी सामान ।

यह मदद सिर्फ सामान की नहीं थी, बल्कि उन अनाथ बच्चों को यह अहसास दिलाने की कोशिश थी कि वे दुनिया में अकेले नहीं हैं। संत रामपाल जी महाराज के शिष्य सियाराम दास ने बताया कि ये मदद एकबार की नहीं है, बल्कि इन बच्चों के लिए तब तक मिलती रहेगी ,जब तक ये बच्चे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते यानि कमाने नहीं लगते। उन्होंने बताया कि बच्चे अभी छोटे है इस कारण खाना भी नहीं बना सकते ऐसे में पास के गांव में रहने वाले एक शिष्य कृष्ण दास जी प्रत्येक दिन तीनों समय इन बच्चों के खाना ससमय पहुंचा दिया करेंगे और इन बच्चों के देखभाल भी करेंगे।

“यह बच्चे हमारे गुरुदेव के सुदामा हैं, यहां बनेगा सुंदर महल”

नागेंद्र दास , (बिहार राज्य सेवादार)

राहत सामग्री लेकर पहुंचे संत रामपाल जी महाराज के बिहार राज्य सेवादार भक्त नागेंद्र दास ने मौके पर एक ऐसा ऐलान किया, जिससे पूरा गांव ‘सत साहेब’ और महाराज जी के जयकारों से गूंज उठा। नागेंद्र दास ने बताया:

“हमारे गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज ने आदेश दिया है कि इन अनाथ बच्चों की इस टूटी झोपड़ी की जगह अतिशीघ्र एक सुंदर आशियाना (महल) बनाया जाएगा। ये बच्चे हमारे गुरुदेव के सुदामा हैं और हमारे गुरुदेव इनके दुखों का अंत करेंगे।”

इस भावुक कर देने वाली घोषणा को सुनकर मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। लोगों ने कहा कि जब सरकार और प्रशासन ने मुंह मोड़ लिया, तब संत रामपाल जी महाराज साक्षात ईश्वर का रूप बनकर इन बच्चों की जिंदगी बचाने आए हैं।
इस अद्वितीय मानवीय मुहिम के दौरान सुशांत दास, सियाराम दास, रंजीत दास, अखिलेश दास, पिंटू दास, सुदू दास सहित बड़ी संख्या में संत रामपाल जी महाराज के शिष्य एवं सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे, जो इस ऐतिहासिक और करुणामयी पल के गवाह बने।

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