गया (मगध लाइव डेस्क): बिहार के गया में पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। शहर के व्हाइट हाउस कंपाउंड रोड स्थित मोतिमणि अपार्टमेंट में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर पुलिस ने 9 साइबर शातिरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
गुप्त सूचना पर पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’
गया के एसएसपी सुशील कुमार ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह गिरोह देशभर के लोगों को अपना शिकार बनाकर लाखों रुपये का चूना लगा रहा था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि व्हाइट हाउस कंपाउंड के मोतिमणि अपार्टमेंट (फ्लैट नंबर-04 सी) में बाहरी राज्यों के कुछ लोग किराये पर रह रहे हैं और वहां से संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे हैं। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नगर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम में नगर-02 के डीएसपी, साइबर थाना प्रभारी, रामपुर थाना और तकनीकी शाखा के अधिकारी शामिल थे।
पुलिस को देखते ही मची अफरा-तफरी

जैसे ही पुलिस की टीम ने चौथे फ्लोर पर स्थित फ्लैट में दबिश दी, अंदर का नजारा चौंकाने वाला था। 9 युवक फर्श पर बैठकर लैपटॉप और मोबाइल के जरिए ऑनलाइन ठगी में व्यस्त थे। पुलिस को अचानक सामने देख अपराधियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने जल्दबाजी में अपने लैपटॉप और मोबाइल बंद करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी को हिरासत में ले लिया और कमरे की तलाशी शुरू कर दी।
फर्जी कस्टमर केयर और रिमोट एक्सेस का खेल

पूछताछ में इन शातिरों ने साइबर ठगी के अपने हाई-टेक तरीके का खुलासा किया है। ये अपराधी खुद को अमेज़न, फ्लिपकार्ट और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों का फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते थे। ग्राहकों को मदद का झांसा देकर ये उनके फोन या कंप्यूटर में एनीडेस्क (AnyDesk), अल्ट्राव्यूअर (UltraViewer) और पोर्ट एसआईपी क्लाइंट (Port SIP Client) जैसे रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवा देते थे।
डेटा चोरी कर खाली कर देते थे बैंक खाते
रिमोट एक्सेस मिलने के बाद अपराधी मोबाइल ऐप की मदद से फर्जी आईडी तैयार करते थे। फिर अपने अन्य साथियों के सहयोग से पीड़ितों के बैंक खाते, व्यक्तिगत जानकारी और गोपनीय डेटा तक पहुंच बना लेते थे। अंत में लिंक और ओटीपी के जरिए बैंक खातों से रुपये निकालकर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। एसएसपी के अनुसार, यह गिरोह तकनीकी रूप से बेहद प्रशिक्षित था और सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दे रहा था।
कोलकाता से जुड़े हैं साइबर ठगी के तार
गिरफ्तार किए गए सभी 9 आरोपी पश्चिम बंगाल (कोलकाता) के विभिन्न थाना क्षेत्रों के निवासी हैं। इनमें नवेद अनवर, अफजल हुसैन, ओसामा परवेज, सदाशिव मान, इंजमाम आलम, सलमान, अदनान अहमद, जीमल हुसैन और मोहम्मद शाहिद शामिल हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के तार देश के अन्य किन राज्यों या किसी बड़े साइबर गिरोह से जुड़े हैं या नहीं। इस संदर्भ में रामपुर थाने में कांड संख्या-472/26 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और फरार अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है।
डिजिटल उपकरणों और नकदी की बड़ी बरामदगी
फ्लैट से पुलिस ने डिजिटल उपकरणों और अन्य सामानों का बड़ा जखीरा बरामद किया है। तलाशी के दौरान मौके से 6 लैपटॉप और 15 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंकों के 22 क्रेडिट और डेबिट कार्ड, 500 जीबी की एक हार्ड डिस्क और एक वाई-फाई मशीन भी बरामद हुई है। अन्य उपकरणों में 4 लैपटॉप चार्जर, 5 माउस और एक्सटेंशन वायर शामिल हैं। आरोपियों के पास से 5 हाथ घड़ियां, एक नोटबुक और 9,500 रुपये की नकद राशि भी पुलिस ने जब्त की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यहां एक बड़ा संगठित नेटवर्क चलाया जा रहा था।







