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कैमरे का जादूगर हमेशा के लिए खामोश: भारतीय फोटोग्राफी के पिता रघु राय का 83 वर्ष की उम्र में निधन

On: Monday, April 27, 2026 3:01 PM

भोपाल के उस अज्ञात बच्चे से लेकर मदर टेरेसा तक — रघु राय की लेंस ने आधुनिक भारत की हर धड़कन को अमर कर दिया, एक युग का अंत

Photo: Raghu Rai © Raghu Rai Foundation / Magnum Photos

नई दिल्ली। भारतीय फोटो पत्रकारिता के जनक और विश्वविख्यात फोटोग्राफर रघु राय का 26 अप्रैल 2026 को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 83 वर्ष के थे। पिछले दो वर्षों से प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे राय का कैंसर बाद में पेट और मस्तिष्क तक फैल गया था। उनके पुत्र और फोटोग्राफर नितिन राय ने परिवार की ओर से यह जानकारी दी। लोधी रोड श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

Photo: Raghu Rai © Raghu Rai Foundation / Magnum Photos

रघुनाथ राय चौधरी के नाम से 18 दिसंबर 1942 को पाकिस्तान के झांग में जन्मे रघु राय सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी फोटोग्राफी की ओर मुड़े। 1965 में मात्र 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार कैमरा संभाला और एक गधे की तस्वीर खींची, जो सीधे लेंस की ओर देख रहा था। भाई शरमपाल चौधरी (एस. पॉल) ने इसे ‘द टाइम्स’ को भेजा और तस्वीर ने पुरस्कार जीता। यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई।

1966 में वे ‘द स्टेट्समैन’ अखबार के चीफ फोटोग्राफर बने। बाद में ‘संडे’ मैगजीन और 1982 से 1991 तक ‘इंडिया टुडे’ में डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी रहे। 1971 में पेरिस में उनकी प्रदर्शनी देखकर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने रघु राय को Magnum Photos में शामिल होने की सिफारिश की। 1977 में वे Magnum के सदस्य बने — पहले भारतीय फोटोग्राफर के रूप में।

Photo:  © Ndtv

रघु राय ने कैमरे से भारत की आत्मा को कैद किया। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में शरणार्थियों और युद्ध की तस्वीरों के लिए उन्हें मात्र 30 वर्ष की उम्र में पद्म श्री पुरस्कार मिला। लेकिन उनकी सबसे चर्चित और भावुक करने वाली कृति थी — 1984 की भोपाल गैस त्रासदी। यूनियन कार्बाइड प्लांट से निकली जहरीली गैस ने हजारों जानें लीं। रघु राय ने पीड़ितों, बच्चों की लाशों और परिवारों को दशकों तक डॉक्यूमेंट किया। उनकी आइकॉनिक तस्वीर ‘Burial of an Unknown Child’ — जिसमें एक अज्ञात बच्चे की खुली आंखें दफनाते हुए दिखाई दे रही हैं — दुनिया भर में औद्योगिक आपदा का प्रतीक बन गई।

उन्होंने इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, दलाई लामा, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और सत्यजीत रे जैसे दिग्गजों के गहन पोर्ट्रेट खींचे। उनकी तस्वीरें सिर्फ घटनाएं नहीं, बल्कि भावनाएं और कहानियां थीं। राय कहा करते थे, “एक तस्वीर जीवन का एक तथ्य उठा लेती है, जो हमेशा जीवित रहता है।” वे ट्रेन, बस या बैलगाड़ी पर भी कैमरा लेकर घूमते और आम भारतीय की जिंदगी को करीब से देखते।

पत्नी गुरमीत, पुत्र नितिन, बेटियां लगन, अवनि और पुरवाई उनके पीछे हैं। रघु राय फाउंडेशन आज भी युवा फोटोग्राफरों को प्रशिक्षित और प्रेरित कर रहा है।राहुल गांधी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “उन्होंने सिर्फ तस्वीरें नहीं खींचीं, बल्कि राष्ट्र की यादों को सहेजा।” शशि थरूर ने उन्हें “भारत के धड़कते दिल को कैद करने वाला दूरदर्शी” बताया।

राहुल गांधी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “उन्होंने सिर्फ तस्वीरें नहीं खींचीं, बल्कि राष्ट्र की यादों को सहेजा।” शशि थरूर ने उन्हें “भारत के धड़कते दिल को कैद करने वाला दूरदर्शी” बताया।

रघु राय ने छह दशक से अधिक समय तक भारत की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक कहानी को विश्व पटल पर प्रस्तुत किया। उनकी विरासत सिर्फ हजारों तस्वीरों में नहीं, बल्कि उन युवा लेंसों में जीवित है जो आज भी उनके नक्शे-कदम पर चल रहे हैं।कैमरे का जादूगर चला गया, लेकिन उनकी तस्वीरें सदियों तक भारत की आत्मा को बोलती रहेंगी।

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