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मगध रेंज में ‘सिंघम’ की धमाकेदार वापसी: आईपीएस विकास वैभव ने संभाला आईजी का पदभार, अपराधियों को दी जीरो टॉलरेंस की चेतावनी

On: Tuesday, May 12, 2026 10:04 PM

गया: बिहार पुलिस की फील्ड कमान में एक बार फिर सख्ती और निडरता की मिसाल कायम करने वाले सुपर कॉप आईपीएस विकास वैभव ने आज मगध रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) पद का भव्य पदभार ग्रहण कर लिया। क्षत्रनील सिंह के बाद यह जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने साफ संदेश दिया – कानून का राज बिना किसी डर या पक्षपात के चलेगा।

शाम करीब 6 बजे विकास वैभव गया जिले के सर्किट हाउस पहुंचे, जहां स्थानीय प्रशासन, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके तुरंत बाद वे सीधे आईजी कार्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से पदभार संभाला। मीडिया से बातचीत में उन्होंने मगध रेंज (गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, अरवल) को अपराध मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।

विकास वैभव: आईआईटी से आईपीएस तक, साहस की अनथक यात्रा

2003 बैच के आईपीएस अधिकारी विकास वैभव आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पूर्व छात्र हैं। आरामदायक नौकरी छोड़कर उन्होंने बिहार की सेवा का रास्ता चुना और दो दशकों में खुद को बिहार पुलिस का सबसे लोकप्रिय और प्रभावी चेहरा साबित कर दिया। उनकी कार्यशैली में सख्ती, निष्पक्षता और जन-सेवा का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।

बगहा में चंबल का खात्मा: जब विकास वैभव 2007 में बगहा के एसपी बने, तब इलाका ‘मिनी चंबल’ के नाम से कुख्यात था। जंगलों में डाकुओं का आतंक छाया रहता था। विकास वैभव ने सख्त अभियानों और समुदाय आधारित पुलिसिंग से न केवल अपराध पर लगाम कसी, बल्कि कई बड़े गिरोहों को सरेंडर कराया। अपहरण जैसी घटनाओं में भारी कमी आई। उनकी उपलब्धियों को याद करते हुए स्थानीय लोगों ने उनके नाम पर चौक और सड़क का नामकरण किया – विकास वैभव चौक और विकास वैभव पथ। आज भी बगहा के लोग उन्हें अपना मसीहा मानते हैं।

रोहतास में नक्सलवाद का अंत: रोहतास एसपी के रूप में उन्होंने ‘ऑपरेशन विध्वंस’ चलाकर कैमूर की पहाड़ियों में नक्सलियों के आतंक को कुचला। रोहतासगढ़ किले के इलाके को माओवादियों के ‘मुक्त क्षेत्र’ से मुक्त कराया। 26 जनवरी 2009 को स्वतंत्रता के बाद पहली बार वहां तिरंगा फहराया गया। यह उनकी नेतृत्व क्षमता और साहस की जीती-जागती मिसाल है।

पटना में ‘कोई भी कानून से ऊपर नहीं’

2015 में पटना एसएसपी के रूप में उन्होंने deviant तत्वों और राजनीतिक दबाव के खिलाफ बेखौफ कार्रवाई की। हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां कीं और कानून व्यवस्था को नई मजबूती दी। बाद में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) में काम करते हुए उन्होंने इंडियन मुजाहिदीन के कई बड़े मामलों की जांच की, यासीन भटकल जैसे आतंकियों की गिरफ्तारी और पूछताछ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बोधगया ब्लास्ट और पटना गांधी मैदान ब्लास्ट जैसे संवेदनशील मामलों को भी उन्होंने सफलतापूर्वक हैंडल किया।

भागलपुर रेंज के डीआईजी रहते हुए उन्होंने जनता दरबार और पुलिस-जनता बैठकें आयोजित कर आम आदमी की समस्याओं का त्वरित समाधान किया। एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) में डीआईजी के रूप में आतंकवाद विरोधी अभियानों को नई गति दी।

सम्मान और प्रेरणा: उनकी निष्ठा और सत्यनिष्ठा के लिए आईआईटी कानपुर ने उन्हें 2019 में सत्येंद्र के. दुबे मेमोरियल अवॉर्ड से नवाजा। वे ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ अभियान के जरिए युवाओं को प्रेरित करते रहे हैं। शिक्षा, इतिहास और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाली उनकी पहल आज हजारों युवाओं को नई राह दिखा रही है।

मगध रेंज में नई उम्मीद की किरण

मगध रेंज ऐतिहासिक और संवेदनशील क्षेत्र है। यहां विकास वैभव की नियुक्ति को बिहार पुलिस में सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पदभार ग्रहण के मौके पर उन्होंने सख्ती से कहा कि थानों में हर शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज होगी और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

छह साल बाद फील्ड पुलिसिंग में उनकी वापसी ने पूरे बिहार में उत्साह का माहौल बना दिया है। जनता और पुलिसकर्मी दोनों ही उम्मीद भरी नजरों से उनकी ओर देख रहे हैं।

विकास वैभव जैसे अधिकारी बिहार के लिए गर्व की बात हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि ईमानदारी, साहस और समर्पण से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। मगध रेंज अब नई ऊर्जा, सख्त कानून व्यवस्था और जन-विश्वास की नई कहानी लिखने को तैयार है।

बिहार पुलिस को इस नई जिम्मेदारी के लिए मगध लाइव न्यूज की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं। विकास वैभव की अगली उपलब्धियां पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा करेंगी।

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