पद्मभूषण पं. साजन मिश्र, पं. राजेंद्र सिजुआर और पं. धर्मनाथ मिश्र की ठुमरी प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध हुए कला अनुरागी

गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत, कला और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए समर्पित संस्था ‘सुर सलिला गयाजी ट्रस्ट’ द्वारा आयोजित 5वीं सप्तदिवसीय शास्त्रीय गायन एवं कत्थक नृत्य कार्यशाला का मंगलवार को भव्य समापन हो गया। स्थानीय सिजुआर भवन (चांदचौरा, मंगलागौरी रोड) में आयोजित इस समारोह में देश-विदेश से आए संगीत व नृत्य साधकों की उपस्थिति ने माहौल को पूरी तरह सांस्कृतिक और गरिमामय बना दिया।
गत 9 जून से शुरू हुई इस प्रतिष्ठित कार्यशाला में आए कला-प्रेमियों और छात्र-छात्राओं ने भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की गूढ़ विधाओं का कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में शास्त्रीय गायन का मार्गदर्शन देश के महान संगीत विभूति पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र के दिव्य सान्निध्य में हुआ, वहीं कत्थक नृत्य कार्यशाला का सफल निर्देशन प्रख्यात नृत्याचार्य पंडित भोला नाथ मिश्र द्वारा किया गया।
स्वर्गीय पंडित जयराम तिवारी की स्मृति को समर्पित रहा समारोह
यह समापन समारोह संगीत के अनन्य साधक स्वर्गीय पंडित जयराम तिवारी जी की पुण्य स्मृति को समर्पित था। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन तथा स्वर्गीय तिवारी जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. डॉ. के.के. नारायण ने की।
विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे आईजी विकास वैभव, हुआ भव्य स्वागत


कार्यशाला के समापन के अवसर पर मगध रेंज के आईजी (पुलिस महानिरीक्षक), प्रसिद्ध सोशल रिफॉर्मर और युवाओं के प्रेरणास्रोत श्री विकास वैभव मुख्य आकर्षण रहे। कार्यक्रम में पहुंचने पर पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने आईजी विकास वैभव का सहर्ष अभिनंदन किया। वहीं ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी महेश लाल गुप्त ने मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ, मोमेंटो और अंगवस्त्र (शॉल) ओढ़ाकर उनका भव्य स्वागत किया।
इस अवसर पर पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने अपने आशीर्वचन में कहा कि: “भारतीय शास्त्रीय संगीत की गुरु-शिष्य परंपरा ही हमारी असली ताकत है। नई पीढ़ी को अपनी इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना से जोड़े रखना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
“ठुमरी के रंग — पूरब के अंग” ने बांधा समां
समापन समारोह की मुख्य सांगीतिक संध्या “ठुमरी के रंग — पूरब के अंग” के नाम रही। इस विशेष सत्र में पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र, पंडित राजेंद्र सिजुआर और पंडित धर्मनाथ मिश्र ने पूरब अंग की ठुमरियों की ऐसी रसधार बहाई कि सभागार में मौजूद सभी श्रोता और कला रसिक भावविभोर हो उठे। कलाकारों की उच्चकोटि की प्रस्तुति और अलौकिक जुगलबंदी पर दर्शकों ने काफी देर तक तालियां बजाकर कलाकारों का अभिवादन किया।
इस बेहतरीन गायन प्रस्तुति में संगतकारों की भूमिका भी लाजवाब रही। तबले पर पंडित राजेश मिश्र, सारंगी पर पंडित विनायक सहाय और तानपुरे पर पंडित गरुण मिश्र व पंडित निबाद व्यास ने अपनी उत्कृष्ट संगत से पूरी शाम को यादगार और जीवंत बना दिया।
आयोजन को सफल बनाने में रही इनकी मुख्य भूमिका
इस सात दिवसीय भव्य कार्यशाला को सफल बनाने में ट्रस्ट के सचिव श्री राजेश्वर सिंह, मुख्य ट्रस्टी पंडित राजेंद्र सिजुआर, ट्रस्टीगण महेश लाल गुप्त, राय मदन किशोर, श्री हरिश्वर सिंह एवं राम नारायण शर्मा ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समारोह में शहर के कई गणमान्य लोग साक्षी बने, जिनमें मुख्य रूप से वरिष्ठ समाजसेविका श्रीमती उषा डालमिया, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सच्चिदानंद प्रेमी, डॉ. रामकृष्ण मिश्र, सुप्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नन्द किशोर गुप्ता, सहकार भारती के प्रदेश संगठन मंत्री श्री राजेश श्रीवास्तव, संस्था के संयुक्त सचिव डॉ. नन्दन कुमार सिन्हा, वरिष्ठ छायाकार रूपक सिन्हा और अरुण आचार्या सहित देश के कोने-कोने से आए संगीत साधक उपस्थित थे।
कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। सुर सलिला गयाजी ट्रस्ट ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और कला के विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार के लिए भविष्य में भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे गरिमामयी आयोजनों का सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।



