गयाजी। मोक्ष की पावन भूमि गयाजी की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम देने के लिए संकल्पित संस्था ‘सुर सलिला गयाजी ट्रस्ट’ द्वारा आगामी 8 मार्च 2026, रविवार को वार्षिक सांस्कृतिक समागम ‘वसंतोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के पावन उद्देश्य को समर्पित यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम स्थानीय हरिदास सेमिनरी ऑडिटोरियम में संध्या 6:00 बजे से प्रारंभ होगा।

संस्था के इस वार्षिक आयोजन का मुख्य ध्येय समाज में शास्त्रीय संगीत के प्रति अभिरुचि जगाना और युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। इस वर्ष समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार की पूर्व प्रमंडलीय आयुक्त एवं ‘निनाद’ सांस्कृतिक संस्था (पटना) की सचिव श्रीमती नीलम चौधरी उपस्थित रहेंगी। उनकी उपस्थिति इस आयोजन को प्रशासनिक और कलात्मक दोनों दृष्टियों से विशिष्टता प्रदान करेगी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शृंखला में देश के विभिन्न कोनों से आए ख्यातिलब्ध कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दिल्ली से आए सुप्रसिद्ध नर्तक श्री पीयूष चौहान एवं प्रीति शर्मा द्वारा प्रस्तुत ‘कथक नृत्य’ होगा, जिसमें पदचापों और भावों की सूक्ष्म जुगलबंदी देखने को मिलेगी। वहीं, कोलकाता की विख्यात शास्त्रीय गायिका पीयू मुखर्जी अपने शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगी।
संगीत की इस महफिल को पूर्णता प्रदान करने के लिए देश के दिग्गज संगतकार भी मंच साझा करेंगे। पखावज पर आरिस गांगानी, गायन सहयोग में जय दधीच, और तबले पर वरसांगानी की थाप गूंजेगी। साथ ही, लखनऊ के प्रतिष्ठित कलाकार पंडित धर्मनाथ मिश्र के हारमोनियम वादन और कोलकाता के पीनाकी चक्रवर्ती के तबला संगत से यह शाम सुरों और तालों के अनूठे त्रिवेणी संगम में तब्दील हो जाएगी।
संस्था के मुख्य ट्रस्टी पंडित राजेंद्र सिजुआर सहित ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों ने गया के संगीत प्रेमियों, कला रसिकों एवं आम जनमानस से इस गौरवशाली आयोजन में सपरिवार सम्मिलित होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ‘वसंतोत्सव’ मात्र एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और समर्पण की एक सामूहिक अभिव्यक्ति है। आयोजन समिति ने विश्वास जताया है कि कला प्रेमियों की उपस्थिति इस पुनीत कार्य को सफल बनाने में महती भूमिका निभाएगी।





