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टीटीई का ऐप तुरंत पकड़ लेगा फर्जी टिकट, डीडीयू मंडल में चला जागरूकता अभियान, यात्रियों को बताई गई अनारक्षित टिकट की खास सुरक्षा विशेषताएँ

On: Wednesday, December 3, 2025 1:43 PM

✍️ देवब्रत मंडल

पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मंडल में रेलवे ने यात्रियों को फर्जी टिकटों से बचाने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। मंडल के वाणिज्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान में अधिकारियों और स्टाफ ने स्टेशन पर पहुँचकर यात्रियों को बताया कि असली टिकट कैसे पहचानें और फर्जी टिकटों से कैसे सावधान रहें।

यह अभियान मंगलवार को डीडीयू जंक्शन, गया, सासाराम और डेहरी ऑन सोन स्टेशनों पर एक साथ चलाया गया। प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को रोका गया, टिकट दिखाए गए और असली टिकट की विशेषताओं को समझाया गया। रेलवे कर्मचारियों ने बताया कि आजकल हेरफेर किए गए टिकटों की समस्या बढ़ रही है, लेकिन अब टीटीई ऐप के कारण यह पकड़ पाना बेहद आसान हो गया है।

UTS टिकट की 5 सुरक्षा विशेषताएँ, जिससे नकली टिकट तुरंत पकड़े जाते हैं

रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों को बताया कि अनारक्षित टिकट (Unreserved Ticketing System–UTS) में कई ऐसी सुरक्षा विशेषताएँ होती हैं जो नकली टिकट से इसे अलग करती हैं—

1. स्वर अलग फ़ॉन्ट में

टिकट पर छपे A, E, I, O, U विशेष फॉन्ट में दिखाई देते हैं। यह फर्जी टिकट बनाने वालों के लिए कॉपी करना मुश्किल होता है।

2. ऊपर बाएँ इंजन का निशान

टिकट के ऊपरी बाएँ हिस्से में इंजन का चिन्ह होता है, जो हर अधिकृत टिकट पर अनिवार्य होता है।

3. स्टॉक नंबर + रैंडम नंबर

हर टिकट पर यूनिक स्टॉक नंबर और यादृच्छिक संख्या दी जाती है। इन्हें दोहराना लगभग असंभव है।

4. भारतीय रेल का वॉटरमार्क

टिकट की स्टेशनरी पर ‘Indian Railways’ का वॉटरमार्क होता है, जिसे रोशनी में देखने पर आसानी से पहचाना जा सकता है।

5. थर्मल टिकट पर QR कोड

थर्मल प्रिंटर से जारी टिकटों पर QR कोड मौजूद रहता है। इसे स्कैन करते ही टिकट की असलियत सामने आ जाती है।

टीटीई ऐप—क्यूआर स्कैन करते ही टिकट की पोल खुल जाएगी

अभियान के दौरान कर्मियों ने बताया कि टिकट चेकिंग अब पहले की तरह सिर्फ आंखों के भरोसे नहीं है।
टीटीई ऐप के जरिए टिकट का ऑनलाइन सत्यापन किया जाता है।

  • QR कोड स्कैन करते ही सिस्टम बता देता है कि टिकट असली है या नहीं।
  • यदि मोबाइल टिकट है तो उसे सिर्फ UTS ऐप में ही दिखाना होगा, स्क्रीनशॉट मान्य नहीं है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक फर्जी टिकटों पर पूरी तरह रोक लगाने में बेहद कारगर साबित हो रही है।

दलालों से बचें, वैध टिकट ही लें—यात्रियों से अपील

स्टेशनों पर यात्रियों से अपील की गई कि वे टिकट सिर्फ अधिकृत टिकट काउंटर, ATVM मशीन या UTS मोबाइल ऐप से ही खरीदें।
किसी अजनबी या दलाल से टिकट लेने पर धोखा होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे दलाल कई बार पुराने या फर्जी टिकट थमा देते हैं, जिससे—

  • यात्री का सफर रद्द हो जाता है
  • भारी जुर्माना लगता है
  • कानूनी कार्रवाई तक हो सकती है

फर्जी टिकट पर सख्त कार्रवाई

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि फर्जी टिकट से यात्रा करना दंडनीय है। नियमों के तहत पकड़े जाने पर यात्री को भारी पेनल्टी के साथ कानूनी कार्रवाई भी झेलनी पड़ सकती है।

डीडीयू मंडल द्वारा चलाया जा रहा यह जागरूकता अभियान यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और परेशानी-मुक्त यात्रा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यात्रियों ने भी अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की जानकारी समय-समय पर मिलती रहे, तो दलालों और फर्जी टिकट माफियाओं पर लगाम लगाना आसान होगा।

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