गया | देवब्रत मंडल
विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष संगम और मोक्ष की भूमि गया में फल्गु नदी की लगातार बिगड़ती स्थिति ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। करोड़ों की लागत से बने रबर डैम और रिवर फ्रंट के बावजूद नदी में जमा गंदगी और गाद को लेकर सामाजिक संगठनों का आक्रोश फूट पड़ा है। गया स्थित ‘वैष्णव युवा ब्रिगेड’ ने इस संबंध में प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए मगध आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को ईमेल के माध्यम से विस्तृत शिकायती पत्र भेजा है।
आस्था के केंद्र में पसरी गंदगी और प्रशासनिक अनदेखी

संस्था के प्राधिकृत प्रतिनिधि नीरज कुमार ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि रबर डैम बनने के बाद उम्मीद थी कि फल्गु का स्वरूप बदलेगा, लेकिन वर्तमान में स्थिति इसके विपरीत है। नदी के तटों पर कीचड़, झाड़-झंखाड़ और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। पिंडदान और तर्पण के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जो गया की वैश्विक छवि को धूमिल कर रहा है।
रबर डैम की उपयोगिता और रखरखाव पर उठे गंभीर सवाल
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप रबर डैम के कुप्रबंधन को लेकर लगाया गया है। कहा गया है कि डैम में भारी मात्रा में गाद (Silt) जमा होने के कारण इसकी जलधारण क्षमता काफी प्रभावित हुई है। प्रशासन द्वारा केवल पानी को रोककर छोड़ दिया गया है, जबकि इसके शुद्धिकरण और निरंतर प्रवाह बनाए रखने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। इसके परिणामस्वरूप ठहरा हुआ पानी दूषित हो चुका है, जिससे धार्मिक परंपराओं की पवित्रता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
टेंडर और धरातल के बीच गायब होती सफाई व्यवस्था
भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करते हुए शिकायत में कहा गया है कि पूर्व में नदी और घाटों की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य नहीं दिखा। यहाँ तक कि लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान भी घाटों की समुचित सफाई नहीं होना प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शाता है। शिकायतकर्ता ने लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत भी इस मामले को दर्ज कराया है।
प्रशासनिक जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई की अंतिम चेतावनी
वैष्णव युवा ब्रिगेड के प्रतिनिधि नीरज कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन और नगर निगम शीघ्र ही फल्गु की स्थिति सुधारने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाते हैं, तो वे इस जनहित के मुद्दे को माननीय न्यायालय के समक्ष ले जाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक धरोहर के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।







