गया: बिहार में सकारात्मक बदलाव और युवाओं को दिशा देने वाले सामाजिक अभियान ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ (LIB) और इसके मुख्य संरक्षक, चर्चित आईपीएस अधिकारी विकास वैभव पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा लगाए गए आरोपों का संगठन ने कड़ा प्रतिकार किया है। गुरुवार को गया में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में संगठन के प्रतिनिधियों ने इन राजनीतिक आरोपों की धज्जियां उड़ाते हुए इन्हें पूरी तरह से तथ्यहीन, भ्रामक और सार्वजनिक विमर्श की गरिमा के खिलाफ बताया। युवाओं ने एक स्वर में स्पष्ट किया कि एक बेदाग अधिकारी और एक निस्वार्थ सामाजिक मंच की छवि धूमिल करने का यह प्रयास किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बेदाग छवि वाले आईपीएस विकास वैभव पर ओछी सियासत अनुचित

प्रेस वार्ता में यह कड़ा संदेश दिया गया कि आईपीएस विकास वैभव का पूरा सेवाकाल ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और निष्पक्षता की मिसाल रहा है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) जैसी शीर्ष एजेंसियों से लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर उनके कार्य की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक ईमानदार अधिकारी के पेशेवर दायित्वों को उनके सामाजिक सरोकारों से जोड़कर उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। श्री वैभव इस अभियान में कोई प्रशासनिक पद नहीं रखते, बल्कि वे अपने सीमित अवकाश के समय में बिहार के युवाओं को प्रेरित करने के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। समाज के हित में किए जा रहे उनके निस्वार्थ योगदान को राजनीतिक रंग देना ओछी मानसिकता का परिचायक है।
युवाओं का गैर-राजनीतिक मंच है ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’
संगठन के मुख्य समन्वयक समीर खान, प्रिंस कुमार, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष सौरभ राज, डॉ. पंकज यादव और युगल किशोर सिंह ने स्पष्ट किया कि ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक अभियान है। आज इस मुहिम से बिहार के चार लाख से अधिक युवा जुड़कर शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। किसी भी विधायक या बाहरी व्यक्ति द्वारा संगठन को वित्तपोषित करने का आरोप सरासर झूठा है। संगठन का हर एक कार्यक्रम इसके स्वयंसेवकों के स्वेच्छिक अंशदान से चलता है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में राजनेताओं या अधिकारियों का आना और तस्वीरें खिंचवाना एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, इसे आर्थिक संरक्षण का प्रमाण मान लेना हास्यास्पद और अतार्किक है।
जांच को भटकाने और प्रभावित करने की राजनीतिक साजिश
औरंगाबाद जिले में डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या के संवेदनशील मामले को लेकर भी संगठन ने स्थिति स्पष्ट की। वक्ताओं ने कहा कि इस मामले की जांच बिहार पुलिस पूरी मुस्तैदी और विधिसम्मत तरीके से कर रही है। ऐसे समय में जब अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है, बिना किसी ठोस साक्ष्य के एक सामाजिक संगठन और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को विवाद में घसीटना सीधे तौर पर अनुसंधान को प्रभावित करने की साजिश नजर आती है। उच्चतम न्यायालय का भी यह स्पष्ट निर्देश रहा है कि लंबित जांच में अनावश्यक सार्वजनिक बयानबाजी से बचा जाना चाहिए, लेकिन नेता प्रतिपक्ष द्वारा बिना किसी आधार के बयानबाजी करना जांच की निष्पक्षता में रोड़ा अटकाने का प्रयास है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से संगठन के तीखे सवाल
लेट्स इंस्पायर बिहार ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों को हवा-हवाई करार देते हुए उनसे सार्वजनिक तौर पर प्रमाण मांगे हैं। संगठन ने पूछा है कि आखिर किस आधार और साक्ष्य के तहत उन्होंने यह दावा किया कि किसी विधायक द्वारा इस अभियान को फंडिंग की जाती है। क्या महज किसी कार्यक्रम की तस्वीर को आर्थिक लेन-देन का सबूत मान लिया गया है, या फिर उनके पास कोई पुख्ता बैंकिंग दस्तावेज है? संगठन ने यह भी सवाल दागा कि जब संबंधित हत्या की प्राथमिकी में कथित विधायक का नाम तक दर्ज नहीं है और जांच चल रही है, तो इस तरह के भ्रामक बयान देकर वह क्या साबित करना चाहते हैं? क्या यह सीधे तौर पर पुलिस की स्वतंत्र जांच प्रक्रिया पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं है?
बिहार के विकास में रोड़ा न बने राजनीति
प्रेस वार्ता के अंत में संगठन ने तमाम राजनीतिक दलों को नसीहत देते हुए कहा कि बिहार के उत्थान के लिए चलाए जा रहे सामाजिक अभियानों को अपनी दलगत राजनीति का अखाड़ा न बनाएं। ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ किसी भी चुनावी गतिविधि से कोसों दूर केवल राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित है। बिना प्रमाण किसी प्रतिष्ठित संस्था और राष्ट्रहित में समर्पित अधिकारी पर कीचड़ उछालने से राजनेताओं को बाज आना चाहिए। संगठन अपने पथ पर अडिग है और बिहार के नव-निर्माण में योगदान देने वाले हर नागरिक के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।







