ब्यूरो रिपोर्ट, मगध लाइव न्यूज़
चंडीगढ़: आध्यात्मिक गुरु संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के लिए न्यायपालिका से एक सुखद और बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देशद्रोह के मामले में जेल में बंद संत रामपाल जी महाराज की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। पिछले 11 वर्ष, 4 महीने और 20 दिनों से हिसार की सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत का सामना कर रहे संत जी के लिए यह आदेश कानूनी दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदित हो कि संत रामपाल जी महाराज को वर्ष 2014 में हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम से एक बेहद तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद गिरफ्तार किया गया था। उस समय उन पर कोर्ट की अवमानना और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे कई आरोप लगाए गए थे। इसके बाद हुई कानूनी कार्रवाई के दौरान उन पर देशद्रोह का मुकदमा संख्या 428 दर्ज किया गया, जिसमें वे लंबे समय से जेल में थे। हालांकि, उनके कानूनी पक्ष ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि उन पर लगे अधिकांश आरोप निराधार हैं और वे केवल संवैधानिक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों और उनके अधिवक्ता कुलदीप सिंह के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज पर कुल 14 मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से 11 मामलों में वे पहले ही ससम्मान बरी हो चुके हैं। अन्य दो प्रमुख मामलों, जिनमें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, उनमें भी माननीय उच्च न्यायालय ने सजा को पहले ही सस्पेंड कर दिया था। अब देशद्रोह के अंतिम लंबित मामले में भी जमानत मिलने से उनके जेल से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त होता दिखाई दे रहा है।
इससे पूर्व, सितंबर 2025 में हिसार की स्थानीय अदालत ने उनकी जमानत याचिका को तकनीकी आधारों पर खारिज कर दिया था, जिसे बाद में उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। माननीय उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और मामले की लंबी अवधि तथा अन्य सह-आरोपियों को मिली राहत को ध्यान में रखते हुए यह उदार फैसला सुनाया है। यह निर्णय न केवल कानूनी प्रक्रिया की एक जीत है, बल्कि देश भर में फैले उनके लाखों अनुयायियों के लिए एक भावुक कर देने वाला क्षण भी है, जो लंबे समय से अपने गुरु की न्यायोचित रिहाई की प्रतीक्षा कर रहे थे।








