
रिपोर्ट: महताब अंसारी , कोंच संवाददाता
कोंच। गया जिले के कोंच प्रखंड क्षेत्र के किसानों और मजदूरों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर शुक्रवार को कोंच प्रखंड कार्यालय परिसर में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। ‘प्रगतिशील किसान संघ’ एवं ‘किसान मजदूर मोर्चा’ के संयुक्त बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन की अध्यक्षता बाल कुमार यादव ने की। कार्यक्रम के समापन पर आंदोलित किसानों ने अपनी 12 सूत्री मांगों से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा, जिसे मौके पर उपस्थित प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी ने प्राप्त किया।
धरना प्रदर्शन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए पूर्व जिला पार्षद रामचंद्र आजाद ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की किसान और मजदूर विरोधी नीतियों के कारण आज खेती-किसानी और मजदूरी दोनों गहरे संकट के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने किसानों की सभी मांगों को पूरी तरह जायज ठहराते हुए सरकार से इनका शीघ्र समाधान करने की पुरजोर वकालत की।
इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों के जरिए स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों ने उत्तर कोयल नहर परियोजना के अधूरे पड़े कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने और कुटकू डैम में फाटक लगाकर उसे तुरंत चालू करने की मांग की। इसके साथ ही, किसानों के सभी प्रकार के सरकारी कर्ज माफ करने, बिजली संशोधन विधेयक-2025 को तत्काल वापस लेने, किसानों को मुफ्त बिजली देने तथा गरीब उपभोक्ताओं को प्रति माह 300 यूनिट निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी मजबूती से रखी गई।
आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा पर जोर देते हुए वक्ताओं ने बिहार में पुरानी मंडी व्यवस्था को पुनः बहाल करने, फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को वापस लेने तथा मजदूर विरोधी कानूनों को निरस्त करने की मांग की। साथ ही, राशन कार्ड से वंचित किए गए गरीब परिवारों के नाम दोबारा जोड़ने, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभ से छूटे हुए पात्र किसानों को इसका लाभ देने और किसानों की मर्जी के बिना किए जा रहे भूमि अधिग्रहण पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई।
सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता जफर बारी उर्फ छोटू मियां, संतोष गिरी, उपेंद्र पासवान, रघुवीर पासवान, महादेव यादव और राम विलास मांझी सहित कई वक्ताओं ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और सरकार ने इन 12 सूत्री मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा। इस पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र के सैकड़ों प्रगतिशील किसान, खेतिहर मजदूर और विभिन्न किसान संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में डटे रहे।







