कोंच प्रखंड क्षेत्र के बिजहरा गांव में बारिश के दिनों में ग्रामीणों का जीवन नारकीय बन गया है। गांव की अधिकांश गलियां और सड़कें कीचड़ व जलजमाव से पट गई हैं, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण आवश्यक कार्यों के लिए भी बाहर निकलने से कतराने लगे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव के पश्चिम दिशा में लगभग आधा किलोमीटर दूर स्थित विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह कीचड़मय हो चुका है। स्कूली बच्चे जूते-चप्पल हाथ में लेकर किसी तरह विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता का अभाव रहा है। जहां सड़क निर्माण से पहले उचित मिट्टी भराई कर फेवर ब्लॉक बिछाया जाना चाहिए था, वहां बिना समतलीकरण के ही कार्य कर दिया गया। परिणामस्वरूप सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा रहता है। जलजमाव के कारण गंदगी फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर नालियों का पानी सड़क पर बहा देते हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। वहीं, गांव के लोग भी अपने अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए संगठित होकर आवाज उठाने में पीछे रहे हैं।
बिजहरा गांव की यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। आखिर कब तक ग्रामीण कीचड़ और जलजमाव के बीच जीवन बिताने को मजबूर रहेंगे? कब विकास योजनाओं का लाभ धरातल पर सही तरीके से दिखाई देगा? और कब गांव के लोग तथा जिम्मेदार विभाग इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए गंभीर पहल करेंगे? फिलहाल बारिश के मौसम में बिजहरा गांव के लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है और वे बुनियादी सुविधाओं की आस लगाए हुए हैं।







