मगध अपडेट बिहार राजनीति क्राइम शिक्षा खेल नौकरी धर्म

सोना लूटकांड: रक्षक ही बने भक्षक; आधी हकीकत, आधा फसाना और पुलिस की साख पर दाग

On: Saturday, January 17, 2026 4:49 PM

✍️ देवब्रत मंडल

कुछ चीजें जैसी दिखाई देती हैं, वैसी होती नहीं। अक्सर जो सच सामने होता है, वह महज एक पर्दा होता है और पर्दे के पीछे छिपी होती है— ‘आधी हकीकत और आधा फसाना’। इन दिनों गया रेल थाना एक ऐसे ही सनसनीखेज सोना लूटकांड को लेकर सुर्खियों में है, जिसने खाकी की चमक को फीका कर दिया है।

भरोसे का कत्ल: जब रक्षक ही निकले लुटेरे

मुसाफिर ट्रेन में इस उम्मीद के साथ सफर करता है कि रेल पुलिस उसकी सुरक्षा के लिए मुस्तैद है। लेकिन 21 नवंबर की उस काली रात ने इस भरोसे की चूलें हिला दीं। हावड़ा से जयपुर जा रहे यात्री धनञ्जय शाश्वत को क्या पता था कि हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस में उसके साथ होने वाली डेढ़ करोड़ की लूट का मास्टरमाइंड कोई अपराधी नहीं, बल्कि सुरक्षा का दम भरने वाले ‘वर्दीधारी’ ही होंगे। धनञ्जय के साथ न केवल मारपीट हुई, बल्कि उसका कीमती सोना भी छीन लिया गया।

सलाखों के पीछे साहब, गलियों में सिपाही फरार

जांच की आंच जब धधकनी शुरू हुई, तो कानून के लंबे हाथों ने अपनों को ही लपेटे में लेना शुरू किया। रेल थानाध्यक्ष (SHO) को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इस कांड में संलिप्त GRP के चार सिपाही और दो बाहरी गुर्गे अब भी पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर फरार हैं।

बड़ा सवाल: आखिर वे कौन से सफेदपोश या प्रभावशाली हाथ हैं, जो इन भगोड़े सिपाहियों को अब तक महफूज रखे हुए हैं?

सोना कटा, बिका… पर मिला कहाँ?

जांच में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब उस कारीगर ने कबूल किया कि उसने लूटे गए सोने को काटकर उसके टुकड़े किए थे। उसने यह भी बता दिया कि उसे इस काम के लिए कौन ले गया और कितनी ‘मजदूरी’ दी गई। लेकिन विडंबना देखिए— सोना काटने वाला मिल गया, साजिश रचने वाला जेल चला गया, पर वो डेढ़ करोड़ का सोना अब भी ‘लापता’ है। क्या सोना जमीन खा गई या आसमान निगल गया?

साख बचाने की जद्दोजहद: नए कप्तान की चुनौती

यह कांड रेल पुलिस की छवि पर एक गहरा बदनुमा दाग है। पटना रेल एसपी से पदोन्नत होकर डीआईजी बने पूर्व अधिकारी और अब नए रेल एसपी अनंत कुमार रॉय के लिए यह मामला किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। 16 जनवरी को गया रेल थाना पहुंचकर एसपी ने कांड की समीक्षा की और लंबित फाइलों को खंगाला। मुख्यालय से लेकर थाने तक, कोशिश सिर्फ एक ही है— उस खोई हुई साख को वापस पाना।

इंतजार अभी बाकी है

गया रेल पुलिस के लिए यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि अपनी ईमानदारी साबित करने की जंग है। जब तक सोना बरामद नहीं होता और फरार सिपाही सलाखों के पीछे नहीं आते, तब तक यह कहानी ‘आधी हकीकत और आधे फसाने’ के बीच झूलती रहेगी।
क्या नए थानाध्यक्ष और एसपी की टीम इस ‘दाग’ को धो पाएगी? यह आने वाला वक्त बताएगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment

📰 Latest:
गया के जिलाधिकारी ने 10 दृष्टिबाधितों को सौंपी विशेष स्मार्ट किट, मुख्यमंत्री संबल योजना से दिव्यांग हो रहे सशक्त | बेलागंज में फर्जी बालू चालान गिरोह का पर्दाफाश: खनन विभाग ने सरगना को किया गिरफ्तार, बड़ी मात्रा में उपकरण बरामद | ✍️पाठकों की कलम से: नयन भरे जल प्रियतम के, बादल भरे जल वारि | गयाजी के विकास को नई ऊंचाई देंगे सड़क और हवाई अड्डा विस्तारीकरण प्रोजेक्ट, जिलाधिकारी ने कार्यों में तेजी लाने का दिया निर्देश | गया-पटना NH पर भीषण सड़क हादसा: फतेहपुर मोड़ पर तेज रफ्तार बाइक ने पैदल व्यक्ति को रौंदा, मौत | झारखंड से लापता 10 बिरहोर जनजाति के बच्चे बिहार में मिले, तकनीकी और त्वरित समन्वय से मिली सफलता | गयाजी: डीएम शशांक शुभंकर ने किया विकास कार्यों का औचक निरीक्षण; मायापुर में 56 एकड़ में आकार ले रहा बिहार का पहला ‘मिलेट्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस | गया में तीन दिवसीय ‘अभिव्यंजना’ कला प्रदर्शनी का भव्य समापन, प्रतिभाओं ने बिखेरा कला का जादू | सिन्धुगढ़ थाना प्रभारी पर पूर्व पंचायत समिति सदस्य ने लगाया मारपीट का आरोप, SSP से शिकायत | अब भूखे नहीं सोएंगे घनश्याम के पोते-पोतियां: दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर बुजुर्ग के घर पहुँची संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’, मिलेगा जीवनभर का सहारा |