न्यूज डेस्क: पुलिस महकमे में मनमानी और करप्शन के खिलाफ मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। अपने दफ्तर में लगी जनसुनवाई के दौरान सामने आए एक गंभीर मामले पर तुरंत एक्शन लेते हुए आईजी ने कोंच थाना में तैनात दारोगा (SI) मनोज कुमार को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही, थाने में सामानों की जब्ती को लेकर बरती गई घोर लापरवाही पर कोंच थानाध्यक्ष (SHO) को भी भविष्य के लिए सख्त चेतावनी दी गई है।
आईजी की इस कार्रवाई से पूरे इलाके के पुलिस महकमे में खलबली मच गई है।
बेटी की ऑनलाइन पढ़ाई रुकी, पिता जेल में और दारोगा ने मांग ली घूस
यह पूरा मामला एक पीड़ित छात्रा को परेशान करने और पुलिस की मनमानी से जुड़ा है। बीती 21 मई 2026 को आईजी दफ्तर में जनसुनवाई चल रही थी। इसी दौरान शानू कुमारी नाम की एक लड़की ने आईजी विकास वैभव के सामने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शानू ने बताया कि कोंच थाना कांड संख्या-67/26 के जांच अधिकारी दारोगा मनोज कुमार ने उनकी दुकान की चाभी और मोबाइल फोन अपने पास रख लिया है। बार-बार मिन्नतें करने के बाद भी वे सामान वापस नहीं कर रहे थे और इसके एवज में पैसों की मांग कर रहे थे, जबकि ये दोनों चीजें आधिकारिक जब्ती सूची में शामिल भी नहीं थीं।
पीड़िता ने आईजी को अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि उनके पिता पिछले ढाई महीने से जेल में बंद हैं, जिससे पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके अकेले के कंधों पर है। मोबाइल न होने से उनकी ऑनलाइन पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई थी। लड़की ने यह भी बताया कि मजबूरी में आकर उसने बीपीएससी (BPSC) परीक्षा पास करने पर सरकार से मिली 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि में से 20,000 रुपये दारोगा मनोज कुमार को घूस के तौर पर दे दिए थे।
टिकारी एसडीपीओ की जांच में खुली पोल
मामले को सुनते ही आईजी विकास वैभव ने तुरंत टिकारी एसडीपीओ को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने का जिम्मा सौंपा। एसडीपीओ टिकारी ने जब जांच की, तो लड़की के सारे आरोप बिल्कुल सच पाए गए। जांच रिपोर्ट में साफ हुआ कि दारोगा मनोज कुमार ने कानून और नियमों को ताक पर रखकर दो मोबाइल और दुकान की चाभी को पिछले दो महीने से ज्यादा समय से अपने पास रखा हुआ था। इसके लिए न तो कोई सरकारी कागजात तैयार किए गए थे और ना ही कोर्ट को इसकी कोई जानकारी दी गई थी।
जांच में दारोगा का यह बर्ताव पूरी तरह अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार से जुड़ा पाया गया। पुख्ता सबूत मिलने के बाद आईजी ने दारोगा मनोज कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। सस्पेंशन के दौरान उनका मुख्यालय गया पुलिस लाइन तय किया गया है, जहां उन्हें सिर्फ गुजारा भत्ता मिलेगा। साथ ही, इस केस की जांच भी किसी दूसरे अधिकारी को सौंप दी गई है।
थाना स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं: आईजी
जांच रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि कोंच थाने के स्तर पर भी जब्त सामानों को रखने में बड़ी लापरवाही हो रही थी। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आईजी ने कोंच थानाध्यक्ष को सख्त हिदायत दी है कि आगे से बिना प्रॉपर जब्ती सूची (सीजर लिस्ट) बनाए थाने में कोई भी सामान नहीं रखा जाना चाहिए।
आईजी मगध क्षेत्र ने साफ शब्दों में कहा है कि पुलिस विभाग में करप्शन, मनमानी और लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता का भरोसा जीतना पुलिस की पहली जिम्मेदारी है और लोगों को परेशान करने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।





