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पासवर्ड का जमाना गया! हैकर्स से बचना है तो तुरंत बदलें फोन की ये सेटिंग; जानें क्या है ‘Passkey’ और यह क्यों है सबसे सुरक्षित

On: Saturday, April 25, 2026 9:24 AM

| मगध लाइव टेक डेस्क |
आज के डिजिटल युग में, एक औसत स्मार्टफोन यूजर के पास दर्जनों सोशल मीडिया अकाउंट, बैंकिंग ऐप्स और जीमेल जैसे प्लेटफॉर्म्स होते हैं। इन सभी को सुरक्षित रखने के लिए हम सालों से ‘पासवर्ड’ का उपयोग करते आ रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पासवर्ड अब बीते जमाने की बात हो चुके हैं? साइबर अपराधियों के बढ़ते हमलों के बीच, गूगल, ऐपल और मेटा जैसी दिग्गज कंपनियां अब ‘Passkey’ (पासकी) को भविष्य का सबसे सुरक्षित हथियार मान रही हैं।

क्या है पासकी (Passkey)?

पासकी एक नई डिजिटल पहचान तकनीक है जो आपको बिना किसी अक्षर या नंबर वाले पासवर्ड के अपने अकाउंट में लॉग-इन करने की सुविधा देती है। यह आपके फोन के सुरक्षा फीचर्स जैसे फिंगरप्रिंट, फेस आईडी या स्क्रीन लॉक पिन का उपयोग करती है। सरल शब्दों में कहें तो, जिस तरह आप अपना फोन अनलॉक करते हैं, ठीक उसी तरह आप अपने जीमेल, इंस्टाग्राम या फेसबुक अकाउंट को भी अनलॉक कर पाएंगे।

पासकी क्यों है पासवर्ड से बेहतर?

पारंपरिक पासवर्ड के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें याद रखना मुश्किल होता है और वे आसानी से चोरी किए जा सकते हैं। पासकी इस समस्या को जड़ से खत्म करती है:

  1. फिशिंग से सुरक्षा: स्कैमर्स अक्सर फर्जी लिंक भेजकर आपका पासवर्ड चुरा लेते हैं। लेकिन पासकी में कोई ‘गुप्त कोड’ होता ही नहीं जिसे आप किसी को बता सकें। यह केवल आपके फिजिकल डिवाइस (फोन) पर काम करती है।
  2. याद रखने का झंझट खत्म: आपको ‘Capital Letter’, ‘Special Character’ और ‘Number’ वाले जटिल पासवर्ड बनाने और उन्हें याद रखने की जरूरत नहीं है।
  3. हैकर्स की पहुंच से बाहर: पासवर्ड सर्वर पर स्टोर होते हैं, जिसे हैक किया जा सकता है। पासकी आपके डिवाइस के Secure Enclave में सुरक्षित रहती है, जिसे क्लाउड या सर्वर से नहीं चुराया जा सकता।

सुरक्षा का गणित: क्रिप्टोग्राफी का जादू

पासकी की सुरक्षा के पीछे असममित क्रिप्टोग्राफी (Asymmetric Cryptography) का सिद्धांत काम करता है। जब आप पासकी सेट करते हैं, तो दो कुंजियाँ (Keys) बनती हैं:

  • पब्लिक की (Public Key): यह वेबसाइट या ऐप के सर्वर पर रहती है।
  • प्राइवेट की (Private Key): यह केवल आपके मोबाइल फोन में सुरक्षित रहती है।
    लॉग-इन करते समय, ये दोनों कुंजियाँ आपस में एक डिजिटल ‘हैंडशेक’ करती हैं। चूंकि आपकी प्राइवेट की कभी भी आपके फोन से बाहर नहीं जाती, इसलिए दुनिया का कोई भी हैकर आपके अकाउंट में सेंध नहीं लगा सकता, भले ही उसे आपके अकाउंट का यूजरनेम पता हो।

मोबाइल यूजर्स के लिए इसका महत्व

मोबाइल यूजर्स के लिए पासकी किसी वरदान से कम नहीं है। मोबाइल पर कीबोर्ड से लंबे पासवर्ड टाइप करना न केवल उबाऊ है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर ‘शोल्डर सर्फिंग’ (पीछे से देखकर पासवर्ड चोरी करना) का खतरा भी रहता है।

  • जीमेल और वर्क प्रोफाइल: गूगल ने अब पासकी को डिफॉल्ट विकल्प बना दिया है। आपके ईमेल में आपकी पूरी डिजिटल जिंदगी (बैंक अलर्ट, पर्सनल चैट, फोटो) होती है, जिसे पासकी अभेद्य बना देती है।
  • सोशल मीडिया: इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर अकाउंट टेकओवर की घटनाएं आम हैं। पासकी सक्रिय होने पर, हैकर आपके अकाउंट को रीसेट या एक्सेस नहीं कर पाएगा।

कैसे शुरू करें पासकी का सफर?

अपने अकाउंट्स को सुरक्षित करना अब बेहद आसान है। अधिकांश ऐप्स की ‘Settings’ में जाकर ‘Security’ या ‘Passkeys’ विकल्प को चुनें। वहां ‘Create a Passkey’ पर क्लिक करें। आपका फोन आपसे बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन मांगेगा और बस, आपका काम हो गया।

विशेषज्ञ की राय: “पासकी केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा की अनिवार्यता है। यह ‘मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ (MFA) के झंझट को खत्म करते हुए उससे कहीं अधिक सुरक्षा प्रदान करती है।” तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो वर्षों में पासवर्ड पूरी तरह विलुप्त हो जाएंगे। यदि आप एक स्मार्टफोन यूजर हैं, तो आज ही अपने महत्वपूर्ण अकाउंट्स पर पासकी इनेबल करें। याद रखें, साइबर सुरक्षा की दौड़ में एक कदम आगे रहना ही बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।

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