पटना | न्यूज डेस्क
बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कला के संरक्षण को समर्पित ‘बोधगया ग्लोबल डायलॉग’ (सीजन-8) का दो दिवसीय आयोजन रविवार को पटना स्थित बिहार म्यूजियम में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। देशकाल सोसायटी द्वारा आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम का समापन कला प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच व्यापक चर्चा के साथ हुआ। शनिवार को शुरू हुए इस संवाद ने न केवल बिहार की कलात्मकता को वैश्विक मंच प्रदान किया, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य भी किया।
वरिष्ठ कला-पारखी डॉ. अंजनी कुमार सिंह ने किया था उद्घाटन

इस दो दिवसीय समागम का विधिवत शुभारंभ शनिवार को बिहार के पूर्व मुख्य सचिव और बिहार म्यूजियम के महानिदेशक डॉ. अंजनी कुमार सिंह के कर-कमलों द्वारा किया गया था। उद्घाटन के अवसर पर डॉ. सिंह ने गया के वरिष्ठ छायाकार रूपक सिन्हा की एकल फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उनके कलात्मक विजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रूपक सिन्हा की तस्वीरें ऐतिहासिक धरोहरों को भविष्य के लिए सहेजने का एक सशक्त माध्यम हैं और उन्होंने कलाकार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
प्रदर्शनी में जीवंत हुई बोधगया और राजगीर की कलात्मकता

आयोजन के दोनों दिन रूपक सिन्हा द्वारा खींची गई तस्वीरों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस प्रदर्शनी में मुख्य रूप से रॉयल भूटान मोनेस्ट्री, बोधगया और राजगीर की स्थापत्य कला व सांस्कृतिक बारीकियों को दर्शाया गया था। दर्शकों और विशेषज्ञों ने इन तस्वीरों में कैद की गई राजगीर की ऐतिहासिक भव्यता और भूटान की आध्यात्मिक कला की विशेष सराहना की। यह प्रदर्शनी 14 और 15 मार्च तक आम जनमानस के लिए खुली रही, जिसमें बड़ी संख्या में दर्शकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
वैश्विक संस्थानों के साझा सहयोग से मिली आयोजन को नई ऊंचाई
‘बोधगया ग्लोबल डायलॉग’ का यह आठवां संस्करण कई प्रतिष्ठित संस्थानों के संयुक्त प्रयास से संभव हो सका। इसमें बिहार म्यूजियम के साथ-साथ इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA), इंडिया-भूटान फाउंडेशन, डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), नव नालंदा महाविहार और ए.एन. कॉलेज, पटना का सक्रिय सहयोग रहा। इन संस्थानों की सहभागिता ने इस संवाद को एक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
देश-विदेश के गणमान्य शिक्षाविदों और बौद्ध लामाओं की रही गरिमामयी उपस्थिति
समारोह के दौरान परिसर में आध्यात्मिक और बौद्धिक वातावरण देखने को मिला। उद्घाटन से लेकर समापन तक देश के जाने-माने शिक्षाविद, कला प्रेमी और विभिन्न देशों से आए बौद्ध लामाओं की उपस्थिति ने चर्चाओं को और अधिक सार्थक बनाया। समापन सत्र में वक्ताओं ने विरासत के संरक्षण और कला के माध्यम से वैश्विक शांति के संदेश पर जोर दिया। रूपक सिन्हा की कला को इस संवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया, जिसने विजुअल आर्ट्स के माध्यम से संस्कृति को परिभाषित किया।






