नई दिल्ली | न्यूज डेस्क
भारतीय रेलवे ने अपने आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पहल के तहत भारतीय रेलवे सुधार 2026 के पांच नए महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। इन नए संशोधनों के साथ, वर्ष 2026 के लिए रेलवे द्वारा स्वीकृत कुल सुधारों की संख्या अब नौ हो गई है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य न केवल यात्रियों के सफर को सुगम बनाना है, बल्कि माल ढुलाई (Logistics) और बुनियादी ढांचा निर्माण (Construction) में पारदर्शिता और दक्षता लाना भी है।
1. यात्री सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव: बोर्डिंग स्टेशन का डिजिटल विकल्प
भारतीय रेलवे सुधार 2026 के तहत सबसे बड़ा बदलाव बोर्डिंग स्टेशन को लेकर किया गया है। अब यात्री अपनी ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से रवाना होने के मात्र 30 मिनट पहले तक डिजिटल माध्यम से अपना बोर्डिंग पॉइंट बदल सकेंगे।पहले यह सुविधा केवल चार्ट तैयार होने से पहले तक ही उपलब्ध थी। अक्सर यात्रियों की ट्रेन छूटने का डर रहता था यदि वे समय पर शुरुआती स्टेशन नहीं पहुँच पाते थे। अब यदि कोई यात्री मुख्य स्टेशन पर नहीं पहुँच पाता, तो वह अगले किसी भी सुविधाजनक स्टेशन को चुन सकता है और उसकी कंफर्म सीट सुरक्षित रहेगी।
2. टिकट कैंसिलेशन और रिफंड प्रक्रिया हुई आसान
रेलवे ने टिकटों की कालाबाजारी रोकने और असली यात्रियों को राहत देने के लिए रिफंड के नियमों में कड़े बदलाव किए हैं:
- नया समय चक्र: टिकट रद्द करने की समय-सीमा को अब 72, 24 और 8 घंटे (प्रस्थान से पहले) कर दिया गया है।
- ऑटोमैटिक रिफंड: ई-टिकट के लिए अब ‘टिकट डिपॉजिट रसीद’ (TDR) भरने की जरूरत नहीं होगी; रिफंड सीधे बैंक खाते में आएगा।
- कहीं भी कैंसिलेशन: अब काउंटर टिकट देश के किसी भी रेलवे स्टेशन से रद्द कराए जा सकेंगे, इसके लिए यात्रा शुरू होने वाले स्टेशन पर जाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
- क्लास अपग्रेड: यात्री अब ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक अपनी श्रेणी (Class) को अपग्रेड कर सकेंगे।
3. नमक और ऑटोमोबाइल परिवहन के लिए नए कंटेनर
माल ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए रेलवे ने दो विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है:
- नमक परिवहन: भारत में सालाना 35 मिलियन टन नमक उत्पादन होता है, जिसमें रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए जंग-रोधी स्टेनलेस स्टील के कंटेनर पेश किए गए हैं। ये कंटेनर ऊपर से लोड और बगल से हाइड्रोलिक सिस्टम के जरिए खाली होंगे, जिससे लोडिंग-अनलोडिंग का खर्च कम होगा।
- ऑटोमोबाइल सेक्टर: यात्री वाहनों के परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी फिलहाल 24% है। अब ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी जरूरत और रूट के हिसाब से कस्टमाइज्ड वैगन डिजाइन कर सकेंगी, जिससे सुरंगों और पुलों की बाधाओं के बावजूद अधिक वाहनों को ढोया जा सकेगा।
4. निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता
रेल मंत्री ने निर्माण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सात सख्त नियमों की घोषणा की:
- अनुभव की अनिवार्यता: ठेकेदारों के लिए पिछले अनुभव की सीमा 35% से बढ़ाकर 50% कर दी गई है।
- सब-कॉन्ट्रैक्टिंग पर लगाम: अब ठेकेदार केवल 40% काम ही दूसरों को सौंप सकते हैं (पहले यह 70% था)। 60% काम सीधे मुख्य ठेकेदार की देखरेख में होना अनिवार्य है।
- अत्यधिक कम बोली (Predatory Bidding) पर रोक: यदि कोई ठेकेदार अनुमानित लागत से 5% से कम बोली लगाता है, तो उसे 5% अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी देनी होगी।
- दंडात्मक प्रावधान: भ्रष्ट और धोखाधड़ी वाले तरीकों पर रोक लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान किए गए हैं।
5. ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का अब तक का सफर
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पिछले सुधारों के भी सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। रेलटेक नीति के तहत एक महीने में 123 प्रस्ताव मिले हैं। वहीं, 86 प्रमुख ट्रेनों में सामान्य और अनारक्षित डिब्बों की ऑन-बोर्ड सफाई को मिशन मोड में शुरू किया गया है। सितंबर 2025 की तुलना में जनवरी 2026 तक थोक सीमेंट की लोडिंग में भी भारी वृद्धि देखी गई है।
भारतीय रेलवे सुधार 2026 केवल कागजी बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय रेल को आत्मनिर्भर और डिजिटल बनाने का एक रोडमैप है। बोर्डिंग पॉइंट बदलने की सुविधा से लेकर निर्माण कार्यों में जवाबदेही तय करने तक, ये कदम रेलवे को आम आदमी के लिए अधिक भरोसेमंद बनाएंगे।








