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विश्व टीबी दिवस गया: जेपीएन अस्पताल से जागरूकता रैली रवाना, 10 हजार से अधिक मरीजों का हुआ सफल इलाज

On: Tuesday, March 24, 2026 4:16 PM

गया | मगध लाइव न्यूजविश्व टीबी दिवस गया के पावन अवसर पर आज जयप्रकाश नारायण (जेपीएन) सदर अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक विशाल जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को क्षयरोग (टीबी) के प्रति जागरूक करना और समाज से इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करना है। कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन डॉ. राजाराम प्रसाद ने ‘टीबी मुक्त गया’ के संकल्प के साथ 100 दिवसीय विशेष टीबी स्क्रीनिंग अभियान का भी विधिवत शुभारंभ किया।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने दिखाई हरी झंडी

जागरूकता रैली को सिविल सर्जन डॉ. राजाराम प्रसाद, संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पंकज सिंह, डीपीएम नीलेश कुमार और डीवीबीडीसीओ डॉ. एमई हक ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर जिला यक्ष्मा कार्यालय से एसटीएलएस मोहम्मद हिदायातुल्लाह, एसटीएस सुनील कुमार और जितेंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे। रैली के माध्यम से संदेश दिया गया कि “टीबी हारेगा, देश जीतेगा”।

गया जिले में टीबी उन्मूलन के उत्साहजनक आंकड़े

संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पंकज सिंह ने जिले की प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि टीबी मरीजों की नियमित ट्रैकिंग और आधुनिक उपचार पद्धति के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।

  • वर्ष 2025 का डेटा: कुल 10,356 मरीजों का सफल इलाज किया गया, जिसमें सरकारी अस्पतालों ने 4,652 और निजी क्लीनिकों ने 5,704 मरीजों को स्वास्थ्य लाभ पहुँचाया।
  • वर्ष 2024 का डेटा: 8,753 मरीजों का उपचार हुआ, जिनमें से 7,680 मरीज अब पूर्णतः स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।

टीबी के प्रमुख लक्षण: इन्हें पहचानना है जरूरी

विश्व टीबी दिवस गया पर विशेषज्ञों ने बताया कि टीबी के लक्षणों को पहचानकर समय पर जांच कराना ही सबसे बड़ा बचाव है।

यदि आपको या आपके आसपास किसी को निम्नलिखित समस्याएं हैं, तो तुरंत जांच कराएं:

  • लगातार खांसी: 2 सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहना।
  • बुखार: शाम के समय हल्का बुखार महसूस होना
  • वजन कम होना: बिना किसी कारण के शरीर का वजन तेजी से गिरना।
  • रात में पसीना: सोते समय अचानक पसीना आना।
  • सीने में दर्द: सांस लेते समय या खांसते समय सीने में दर्द का अनुभव।

टीबी से बचाव और उपचार की सरकारी सुविधाएं

डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि टीबी मुख्य रूप से ‘माइक्रोबैक्टीयम ट्यूबरक्लोसिस’ नामक सूक्ष्मजीव से फैलता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने (ड्रॉपलेट) से हवा के माध्यम से फैलता है।

  • निक्षय पोर्टल: स्वास्थ्य विभाग निक्षय पोर्टल के माध्यम से हर मरीज की डिजिटल ट्रैकिंग कर रहा है ताकि दवा का एक भी डोज न छूटे।
  • पोषण भत्ता: सरकार की ओर से मरीजों को उपचार के दौरान उचित खान-पान के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।
  • निक्षय मित्र: वर्तमान में जिले में 37 निक्षय मित्र हैं जो मरीजों को प्रोटीन युक्त ‘फूड बास्केट’ प्रदान कर रहे हैं।

डॉक्टर की सलाह: बीच में न छोड़ें दवा

सिविल सर्जन ने आगाह किया कि टीबी की दवा का कोर्स पूरा करना अनिवार्य है। अक्सर मरीज 1-2 महीने दवा खाकर बेहतर महसूस करने पर इलाज छोड़ देते हैं। ऐसा करने से ‘दवा-प्रतिरोधी टीबी’ (Drug-Resistant TB) विकसित हो जाता है, जिस पर साधारण दवाएं असर नहीं करतीं और यह जानलेवा हो सकता है।अतः, जिला स्वास्थ्य समिति गया की अपील है कि सही समय पर जांच कराएं, पूरा इलाज लें और टीबी मुक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

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