मुगलसराय (डीडीयू नगर): भारतीय रेलवे में अब कोई भी वस्तु बेकार नहीं है, बल्कि वह राजस्व अर्जन का एक बड़ा जरिया बन चुकी है। पूर्व मध्य रेल के पंडित दीन दयाल उपाध्याय (DDU) मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कबाड़ (स्क्रैप) की बिक्री में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मंडल ने संसाधन प्रबंधन और राजस्व सृजन की दिशा में प्रभावी कदम उठाते हुए ₹80 करोड़ का अपना निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है।
कुशल नेतृत्व और पारदर्शी ई-नीलामी से मिली सफलता
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि मंडल रेल प्रबंधक श्री उदय सिंह मीना के कुशल मार्गदर्शन और वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक श्री सुधीर प्रसाद सिंह के सक्षम नेतृत्व का परिणाम है। रेलवे द्वारा अपनाई गई ई-नीलामी (e-auction) प्रक्रिया ने इस लक्ष्य को हासिल करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रभावी नियोजन और निरंतर निगरानी के कारण ही समयबद्ध तरीके से कबाड़ का निष्पादन संभव हो सका, जिससे रेलवे के खजाने में भारी राजस्व जमा हुआ है।
स्वच्छता और सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम
कबाड़ का समय पर निस्तारण न केवल रेलवे के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत है, बल्कि यह कार्यस्थलों की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है। अनुपयोगी सामग्री के हटने से रेलवे परिसरों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध हुआ है, जिससे सुरक्षा मानकों में सुधार आया है और स्वच्छता अभियान को भी नई गति मिली है। इसके साथ ही, पुराने लोहे और अन्य संसाधनों के पुनर्चक्रण (recycling) से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
टीम वर्क और भविष्य के संकल्प
इस सफलता के पीछे डीडीयू मंडल के सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का सामूहिक समर्पण और बेहतर समन्वय रहा है। सामूहिक प्रयासों के कारण ही कबाड़ सामग्री का सुव्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित हो पाया है। डीडीयू मंडल प्रबंधन का कहना है कि वे भविष्य में भी इसी प्रकार के उत्कृष्ट प्रदर्शन को जारी रखते हुए और भी ऊंचे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।






