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शेरघाटी में 75 लाख की लागत से मिट्टी जांच प्रयोगशाला शुरू, कृषि मंत्री ने किया डिजिटल उद्घाटन

On: Thursday, April 9, 2026 6:49 PM

गया जिले के शेरघाटी अनुमंडल के किसानों के लिए आज का दिन कृषि के क्षेत्र में एक नई क्रांति लेकर आया है। बिहार के कृषि मंत्री माननीय श्री राम कृपाल यादव ने आज ऑनलाइन माध्यम से शेरघाटी प्रखंड परिसर में नव-निर्मित अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशाला का भव्य उद्घाटन किया। लगभग 75 लाख रुपये की लागत से तैयार हुई यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने और अपनी आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। इस गौरवशाली अवसर पर विभाग के प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल और कृषि निदेशक श्री सौरभ सुमन यादव की गरिमामयी उपस्थिति रही, जबकि प्रयोगशाला परिसर में जिला कृषि पदाधिकारी श्री संजीव कुमार सहित विभाग के कई आला अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद रहे।

उद्घाटन के दौरान कृषि मंत्री ने मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि अब किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच कराने के लिए दूर नहीं जाना होगा। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य के अनुरूप ही उर्वरकों का चयन करें ताकि अनावश्यक खर्चों में कमी आए और पैदावार में वृद्धि हो। गया जिले में कृषि सेवाओं का विस्तार अब जमीनी स्तर तक पहुंच चुका है। वर्तमान में बाजार समिति स्थित जिला स्तरीय प्रयोगशाला और बोधगया की अनुमंडल प्रयोगशाला के साथ-साथ जिले में चार ग्राम स्तरीय प्रयोगशालाएं पहले से ही सक्रिय हैं। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए जिला पदाधिकारी द्वारा छह और ग्राम स्तरीय प्रयोगशालाओं की स्वीकृति दी गई है, जिससे मिट्टी जांच का नेटवर्क और भी सुदृढ़ हो जाएगा।

सहायक निदेशक (रसायन) श्री राजीव रंजन यादव ने प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यहाँ किसानों को निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। इस कार्ड में मिट्टी के जैविक कार्बन, पी.एच. मान और नाइट्रोजन-फास्फोरस जैसे मुख्य तत्वों के साथ-साथ जिंक, बोरॉन और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों सहित कुल 12 पैमानों की सटीक जानकारी होगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि हर दो वर्ष में मिट्टी की नियमित जांच कराने से किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन में मदद मिलती है।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व अनुदानित दरों पर दिए जा रहे हैं, जबकि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधा के लिए चलंत मिट्टी जांच प्रयोगशाला भी निरंतर संचालित की जा रही है।
अंत में, विभाग के अधिकारियों ने जिले के कृषक समुदाय से अपील की है कि वे रसायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खादों जैसे वर्मीकम्पोस्ट, हरी खाद और पी.एस.बी. के उपयोग को प्राथमिकता दें। इस नई प्रयोगशाला के सक्रिय होने से न केवल मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि आने वाले समय में शेरघाटी क्षेत्र के किसान कम लागत में गुणवत्तापूर्ण और अधिक उत्पादन प्राप्त कर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान करेंगे।

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