
पटना: ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्मार्ट पीडीएस’ के ऊंचे-ऊंचे दावों के बीच बिहार की राशन व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ गई है। राज्य में लागू की जा रही नई ‘स्मार्ट पीडीएस २.०’ (Smart PDS 2.0) व्यवस्था अपने शुरुआती दिनों में ही आम जनता के लिए आफत बन गई है। तकनीकी दिक्कतों के चलते पिछले 24 घंटे से पूरे सूबे में राशन वितरण ठप्प है। आधिकारिक एईपीडीएस (AePDS) पोर्टल पर ५ जून २०२६ को ‘टुडेज ट्रांजैक्शन’ (Today’s Transactions) का आंकड़ा शून्य (0) दर्ज किया गया है और सक्रिय दुकानों की संख्या भी जीरो दिखाई दे रही है, जो सिस्टम की नाकामी की पोल खोलने के लिए काफी है।
स्मार्ट सिस्टम के फेर में फंसा गरीबों का निवाला
बिहार सरकार ने राशन वितरण को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और एकीकृत बनाने के उद्देश्य से मई के अंत में नया पोर्टल लॉन्च किया था। इस व्यवस्था में चोरी रोकने के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (अंगूठे का निशान) अनिवार्य किया गया है। लेकिन जमीनी स्तर पर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए बिना थके-हारे सिस्टम पर नई तकनीक थोपने का नतीजा यह हुआ कि मुख्य सर्वर पूरी तरह क्रैश हो गया। पीओएस (POS) मशीनें महज एक शोपीस बनकर रह गई हैं और गरीबों का अनाज दुकानों में ही लॉक हो गया है।
आंखमिचौली करता सर्वर, भीषण गर्मी में पिसती जनता

इस संकट में सबसे ज्यादा परेशानी सर्वर के आने-जाने से हो रही है। पूरे दिन में कभी-कभार कुछ मिनटों के लिए सर्वर काम करता है, दो-चार लोगों का अंगूठा लगता है और फिर बंद हो जाता है। इसी उम्मीद में इस जानलेवा गर्मी और चिलचिलाती धूप में बुजुर्ग, लाचार महिलाएं और दिहाड़ी मजदूर सुबह से आकर दुकानों के बाहर कतारों में खड़े हो जाते हैं। लोग अपना पूरा दिन इसी आस में गँवा रहे हैं कि न जाने कब सर्वर ठीक हो जाए और उन्हें उनके हिस्से का अनाज मिल सके, लेकिन अंत में उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है।
डीलरों की बेबसी: इस बदहाली से जितने परेशान आम लोग हैं, उतने ही राशन डीलर भी तंग आ चुके हैं। राशन न मिलने से गुस्साए उपभोक्ताओं के तीखे सवालों का सामना डीलरों को करना पड़ रहा है, जबकि सिस्टम को ठीक करना उनके हाथ में नहीं है। डीलरों ने प्रशासन से तत्काल दखल देने की मांग की है।
दावों की चमक के पीछे प्रशासनिक चुप्पी
पारदर्शिता लाने और फर्जी कार्ड पर रोक लगाने के नाम पर बनाई गई यह डिजिटल दीवार आज गरीबों के पेट और राशन के बीच का सबसे बड़ा रोड़ा बन चुकी है। विडंबना यह है कि संक्रमण काल (मई के अंत) के दौरान नए राशन कार्ड के आवेदनों को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, जिससे जरूरतमंद पहले से परेशान थे। अब इस महा-संकट के बाद भी खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान या सफाई नहीं आई है। प्रशासन की यह चुप्पी बताती है कि डिजिटल क्रांति के शोर में जनता की बुनियादी तकलीफें सुनने वाला कोई नहीं है।
अस्थायी समाधान और सलाह:
जब तक मुख्य सर्वर पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक लाभार्थी कुछ-कुछ समय के अंतराल पर कोशिश कर सकते हैं। शाम या रात के वक्त जब सर्वर पर ट्रैफिक कम होता है, तब राशन मिलने की संभावना थोड़ी बढ़ जाती है। उपभोक्ता राशन दुकान का लाइव स्टेटस चेक करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट epos.bihar.gov.in या epds.bihar.gov.in पर भी विजिट कर सकते हैं। सरकार को यह समझना होगा कि कागजी आंकड़ों में ‘स्मार्ट’ बनने से पेट नहीं भरता, जमीनी व्यवस्था को दुरुस्त करना सबसे पहली जरूरत है।








