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डुमरिया प्रखंड का मँझौली हाट: हजारों की भीड़, लेकिन न पानी, न शौचालय—अव्यवस्थाओं के बीच सजता बाजार

On: Wednesday, March 5, 2025 10:48 AM

दिवाकर मिश्रा डुमरिया (गया) |

कभी “काला पानी” और “लाल आतंक” के नाम से पहचाने जाने वाले नक्सल प्रभावित डुमरिया प्रखंड के मँझौली बाजार में विकास की रोशनी पहुंचने में दशकों लग गए, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का आज भी अभाव है। मंगलवार को यहां साप्ताहिक हाट लगता है, जो आसपास के गांवों के लोगों के लिए जरूरी सामान खरीदने और बेचने का प्रमुख केंद्र है।

पशु हाट से लेकर घरेलू जरूरतों तक मिलता है सबकुछ

मँझौली का पशु हाट क्षेत्र का सबसे पुराना हाट माना जाता है। यहां पशु-पक्षी, साग-सब्जी, किराना सामान, खाद्य सामग्री, लोहे के बर्तन, यहां तक कि पारंपरिक औजार जैसे टांगी, तावा, कड़ाही, चिमटा और काजल करने के लिए कजरोटा भी आसानी से उपलब्ध होता है। हाट में गुड़ की सुगंध हर ओर फैली रहती है, जो बाजार में रौनक बढ़ा देती है।

सुविधाओं का अभाव: न पीने का पानी, न शौचालय

हाट में हजारों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन यहां न तो पीने के पानी की कोई व्यवस्था है और न ही शौचालय की। गर्मी के दिनों में जब व्यापारियों और ग्राहकों को प्यास लगती है, तो वे पानी के लिए इधर-उधर भटकते हैं। महिला सब्जी विक्रेताओं को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सब्जी विक्रेता उमेश महतो ने बताया कि पूरे बाजार में एक भी चापाकल नहीं है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। वहीं, ग्रामीण महिला मनोरमा देवी ने कहा कि महिलाओं को मल-मूत्र त्यागने तक के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।

सड़क किनारे लगने वाले बाजार से जाम की समस्या

मंगलवार को लगने वाला साप्ताहिक हाट मुख्य सड़क के किनारे लगता है, जिससे बाजार के दौरान यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है। सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है और वाहन चालक घंटों फंसे रहते हैं। भीड़भाड़ के कारण दुर्घटना की संभावना भी बनी रहती है, लेकिन इसे व्यवस्थित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

व्यवस्था के नाम पर सिर्फ वसूली, प्रशासन मौन

बाजार में पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए रसीद काटी जाती है, लेकिन इसका कोई लेखा-जोखा नहीं होता। सब्जी विक्रेताओं से भी अवैध वसूली की जाती है, और यह पैसा कहां जाता है, इसका कोई हिसाब नहीं मिलता। बाजार में पुलिस गश्ती न होने के कारण ग्राहकों को चोरी-चकारी की घटनाओं का भी सामना करना पड़ता है। मोबाइल चोरी होना और साइकिल चोरी जैसी घटनाएं आम हो गई हैं।

त्योहारों से पहले महंगाई की मार

रमजान का महीना नजदीक आने के कारण सब्जियों और फलों की मांग बढ़ गई है, जिससे इनकी कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि महंगाई बढ़ने से ग्राहकों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन खरीदारी कम हो रही है।

होली से पहले मांस कारोबार में तेजी

बाजार में मांस और मछली की बिक्री मुख्य रूप से सड़क किनारे होती है, जिससे बदबू पूरे हाट में फैल जाती है। होली के कारण बकरे और मुर्गों की बिक्री में तेजी आई है। बिहार और झारखंड की सीमा से लगे होने के कारण झारखंड के चतरा और हंटरगंज से व्यापारी यहां आकर व्यापार करते हैं। गर्मी की शुरुआत के साथ ही मिट्टी के बर्तनों की मांग भी बढ़ने लगी है। बाजार में घड़ा, सुराही, दिया, ढक्कन और कड़ाही जैसे मिट्टी के बर्तन खूब बिक रहे हैं।

जनप्रतिनिधि सिर्फ वादे करते हैं, विकास अधूरा

बाजार के लोगों का कहना है कि चुनाव के समय सांसद, विधायक और मुखिया यहां वोट मांगने आते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान कोई नहीं करता। बाजार में न तो शेड बनाए गए हैं, न ही पानी की व्यवस्था की गई है। हजारों की भीड़ होने के बावजूद यहां व्यापारियों और ग्राहकों के लिए कोई बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है।

सरकार कब देगी ध्यान?

मँझौली हाट सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का केंद्र है। लेकिन अव्यवस्थित बाजार, बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासन की लापरवाही से यहां के व्यापारी और ग्राहक परेशान हैं। सवाल उठता है कि क्या सरकार और जनप्रतिनिधि इस समस्या पर ध्यान देंगे, या फिर मँझौली हाट की तस्वीर ऐसे ही बनी रहेगी?

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