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21वीं सदी में भी अंधविश्वास का खूनी खेल: गया में ‘डायन’ बताकर पीटी गई दूसरी बुजुर्ग महिला ने भी तोड़ा दम, इलाके में मातम

On: Sunday, May 17, 2026 8:40 PM

मगध लाइव डेस्क, गया: बिहार के गया जिले से अंधविश्वास और सामाजिक कुप्रथा का एक बेहद ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। फतेहपुर थाना क्षेत्र के नावनगर गांव में ‘डायन’ का आरोप लगाकर प्रताड़ित की गईं दूसरी बुजुर्ग महिला मुनरवा देवी (65 वर्ष) ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पांच दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद रविवार को उनकी मृत्यु हो गई।
बता दें कि इसी बर्बर घटना में गंभीर रूप से घायल बुल्की देवी की मौत वारदात वाले दिन (सोमवार) को ही हो गई थी। इस दोहरी मौत के बाद पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग इस अमानवीय कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, नावनगर गांव में कुछ स्थानीय लोगों ने घोर अंधविश्वास के वशीभूत होकर दोनों बुजुर्ग महिलाओं को ‘डायन’ करार दिया था। इसके बाद उन पर जानलेवा हमला कर बेरहमी से मारपीट की गई। गंभीर रूप से घायल दोनों महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
घटना के तुरंत बाद मृतका मुनरवा देवी के पुत्र मुकेश मांझी ने फतेहपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 13 आरोपी भेजे गए जेल

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फतेहपुर थाना पुलिस ने त्वरित एक्शन लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शनिवार को ही घटना में संलिप्त सभी 13 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

गांव में गम और तनाव का माहौल

रविवार की देर शाम पोस्टमार्टम के बाद जब मुनरवा देवी का शव नावनगर गांव पहुंचा, तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल और गमगीन हो गया। देर शाम ही गांव के श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना के बाद से गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
यह घटना एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और जागरूकता की कमी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों को इस दिशा में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी और मासूम को ऐसी बर्बरता का शिकार न होना पड़े।

संपादकीय टिप्पणी (Magadh Live): हमारा समाज आज 21वीं सदी में जी रहा है, लेकिन ‘डायन-ओझा’ जैसी कुप्रथाएं आज भी ग्रामीण अंचलों में पैर पसारे हुए हैं। मगध लाइव इस अंधविश्वास और हिंसा की कड़ी निंदा करता है।

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