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फल्गु नदी को फिर मिलेगा प्राकृतिक स्वरूप! गया में नदी किनारे होगा बड़े पैमाने पर पौधरोपण, 123 खराब बोरवेल बनेंगे वाटर रिचार्ज सिस्टम

On: Friday, October 23, 2026 7:52 PM

मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गयाजी

गया की जीवनरेखा मानी जाने वाली फल्गु नदी के संरक्षण, जीर्णोद्धार और आसपास के क्षेत्रों में लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने, जल का ठहराव सुनिश्चित करने और वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत फल्गु नदी के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण, खराब पड़े बोरवेल को वाटर रिचार्ज बोरवेल में बदलने और सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है।

इस संबंध में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन विभाग, जल संसाधन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया।

IIT रुड़की के सर्वेक्षण में सामने आई नदी के जीर्णोद्धार की जरूरत

बैठक में बताया गया कि भारत सरकार के जल शक्ति मिशन के माध्यम से आईआईटी रुड़की द्वारा झारखंड के चतरा जिले के लावा-लौंग स्थित फल्गु नदी के उद्गम क्षेत्र से लेकर गया और जहानाबाद सहित आगे के क्षेत्रों तक विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में नदी के बदलते प्राकृतिक स्वरूप, जल के ठहराव में कमी और इसके समग्र जीर्णोद्धार की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।

इसी रिपोर्ट के आधार पर नदी संरक्षण और जल संचयन से संबंधित योजनाओं को समन्वित तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने जिला वन पदाधिकारी और उप विकास आयुक्त को गया जिले में फल्गु नदी के पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण कराकर दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसके लिए संबंधित अंचलाधिकारियों को मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारियों और वन विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कर पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित करने को कहा गया।

123 खराब बोरवेल से बढ़ाया जाएगा भूजल स्तर

फल्गु नदी के आसपास के इलाकों में गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए प्रशासन ने खराब पड़े बोरवेल को उपयोगी बनाने की योजना पर विशेष जोर दिया है। बैठक में जल संसाधन विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि गया, बोधगया और डोभी क्षेत्र में कुल 123 खराब (डिफंक्ट) बोरवेल चिह्नित किए गए हैं।

जिलाधिकारी ने इन सभी बोरवेल को वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके अलावा फल्गु नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर की चौड़ाई वाले क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। जिला पंचायती राज पदाधिकारी को संबंधित पंचायतों के माध्यम से अन्य खराब बोरवेल की भी पहचान कर उनके पुनर्विकास की कार्ययोजना तैयार कराने का निर्देश दिया गया।

जलजमाव वाले इलाकों में बनेगा सोख्ता, सरकारी भवनों में होगी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था

बैठक में वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन को लेकर भी कई अहम निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि फल्गु नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के दायरे में जिन स्थानों पर जलजमाव की समस्या रहती है, वहां सोख्ता निर्माण कराया जाए। इससे बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने और भूजल स्तर में सुधार करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही क्षेत्र में स्थित बड़े सरकारी भवनों और प्रमुख प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने का निर्देश दिया गया, ताकि बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोका जा सके और उसका उपयोग भूजल पुनर्भरण के लिए किया जा सके।

आहर, पोखर और पइन का होगा भौतिक निरीक्षण

पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण को भी फल्गु नदी के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जिलाधिकारी ने लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता को नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के क्षेत्र में मौजूद आहर, पोखर और पइन का भौतिक निरीक्षण कर उनकी मौजूदा स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया। अधिकारियों को यह भी पता लगाने को कहा गया कि किन स्थानों पर नए आहर, पोखर और पइन के निर्माण अथवा पुराने जलस्रोतों के पुनर्जीवन की जरूरत है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि फल्गु नदी के संरक्षण को लेकर पौधरोपण, जल संचयन, खराब बोरवेल का पुनः उपयोग, पारंपरिक जलस्रोतों का संरक्षण और नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने से जुड़े कार्यों को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। बैठक में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, नदी संरक्षण से जुड़े समाजसेवी संजय सज्जन सहित जल संसाधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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