मगध लाइव न्यूज़ | गयाजी
विजयादशमी के पावन अवसर पर आज सुबह गया जी के ऐतिहासिक दुर्गा बाड़ी में आस्था, उल्लास और भावनाओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद जब विसर्जन की घड़ी करीब आई, तो वहां मौजूद सभी महिलाओं की आंखें भर आईं। किसी घर से जब एक बेटी की विदाई होती है, ठीक उसी भावुकता के साथ महिलाओं ने मां भवानी को विदा किया। वर्षों से चली आ रही इस समृद्ध परंपरा ने पूरे माहौल को भक्तिमय और भावुक कर दिया।
पान के पत्तों से पोंछे मां के नयन और किया सुहाग अर्पण

विसर्जन से पूर्व की जाने वाली रस्में बेहद खास और मर्मस्पर्शी रहीं। महिलाओं ने अपनी असीम श्रद्धा प्रकट करते हुए मां दुर्गा को सुहाग की सभी सामग्री अर्पित की और उन्हें सिंदूर लगाया। माता को अपने हाथों से मिठाई खिलाने के बाद, महिलाओं ने पान के पत्तों से मां के नयन पोंछे। यह दृश्य इतना जीवंत था मानो सच में एक मां अपनी बेटी को ससुराल के लिए विदा कर रही हो। हर किसी के होठों पर बस एक ही प्रार्थना थी कि अगले बरस मां फिर से उनके घर-आंगन में खुशियां लेकर आएं।
‘सिंदूर खेला’ में दिखा अखंड सौभाग्य का उल्लास




विदाई की इस भावुक बेला के बाद दुर्गा बाड़ी परिसर “सिंदूर खेला” के पारंपरिक रंग में रंग गया। महिलाओं ने मां को चढ़ाया गया सिंदूर एक-दूसरे की मांग और गालों पर लगाकर अखंड सौभाग्य की कामना की। दुर्गा बाड़ी गया जी में सिंदूर खेलने की यह परंपरा काफी पुरानी है। सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल बंगाली समुदाय ही नहीं, बल्कि अन्य सभी वर्गों की महिलाएं भी पूरे उत्साह के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। आज भी यही मनमोहक नजारा दिखा, जहां लाल सिंदूर से रंगी महिलाओं ने एक-दूसरे को भोग का प्रसाद खिलाया और परिवार के सुख, शांति और वैभवपूर्ण जीवन की मंगलकामनाएं दीं।






