बाराचट्टी/गया: समाज में निस्वार्थ सेवा और त्याग की मिसाल पेश करने वाले व्यक्तित्वों को विस्मृत होने से बचाने के लिए बाराचट्टी विधानसभा के मेरोखाप गाँव (पंचायत: सिन्दुआर, प्रखंड: मोहनपुर) से एक सराहनीय पहल सामने आई है। वन विभाग के सेवानिवृत्त उच्च अधिकारी और प्रखर समाजसेवी स्वर्गीय श्री शंभु शरण की स्मृति में गाँव के मुख्य मार्ग का नामकरण करने के लिए क्षेत्रीय विधायक ज्योति मांझी को एक औपचारिक प्रस्ताव सौंपा गया है।
त्याग की प्रतिमूर्ति थे शंभु शरण जी
यह प्रस्ताव उनके पौत्र अंकुर रंजन (वरिष्ठ सचिवालय सहायक, केंद्रीय विद्यालय संगठन) द्वारा दिया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि स्वर्गीय शंभु शरण जी ने न केवल अपने सेवाकाल में, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी अपना जीवन पिछड़े वर्गों के उत्थान में लगा दिया। आज मेरोखाप में अनुसूचित जनजाति के परिवारों के पास जो भूमि है और जिस विद्यालय में गाँव का भविष्य गढ़ा जा रहा है, वह भूमि शंभु शरण जी द्वारा ही दान स्वरूप दी गई थी।
ग्रामीणों की भावनाओं का प्रतीक
पौत्र अंकुर रंजन ने बताया कि 02 सितंबर 2014 को मेरे दादा शंभू शरण जी के देहावसान के बाद भी उनका परिवार उसी सेवाभावी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा “जिस व्यक्ति ने अपनी निजी संपत्ति और जीवन का बड़ा हिस्सा निर्धन और वंचितों को सशक्त बनाने में लगा दिया, उनके नाम पर मार्ग का नामकरण करना न केवल उनके प्रति श्रद्धांजलि होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।”
स्वयं के खर्च पर ‘स्वागत द्वार’ का निर्माण
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अंकुर रंजन ने स्पष्ट किया है कि मार्ग पर बनने वाले भव्य ‘स्वागत द्वार’ का संपूर्ण आर्थिक व्यय वह स्वयं वहन करेंगे। इससे पंचायत कोष पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि यह केवल एक नामकरण नहीं, बल्कि गाँव की मिट्टी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक माध्यम है। ग्रामीणों को पूर्ण विश्वास है कि बाराचट्टी विधायक ज्योति मांझी जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करेंगी।






