पटना। गांधी मैदान में आयोजित राष्ट्रीय गांधी शिल्प बाज़ार में गया ज़िला की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था सारंग आर्ट एंड म्यूज़िक की लोकगायन प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार एवं बिहार संग्रहालय के तत्वावधान में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में बिहार की लोकधुनों, भावनाओं और मिट्टी की खुशबू एक साथ मंच पर सजी।

लोकगायन में सौरभ कुमार और आशीष शंकर की सशक्त आवाज़, हारमोनियम पर ईशान की मधुर संगत तथा तबले पर हर्ष की लयबद्ध प्रस्तुति ने पूरे परिसर को लोकसंगीत की आत्मा से भर दिया। तालियों की गूंज और दर्शकों की एकाग्रता ने कलाकारों का उत्साह और बढ़ाया।
कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति रही स्वलिखित रचना “धरती की माटी”, जिसका शीर्षक “माटी की महक” है। इस गीत में झूमर, चैता और भोजपुरी लोकधुनों की आत्मा को केंद्र में रखते हुए बिहार की मिट्टी, संस्कृति और संवेदनाओं को जीवंत रूप में उकेरा गया। उल्लेखनीय है कि इस रचना की धुन टीम के सभी सहयोगी कलाकारों ने सामूहिक रूप से तैयार की, जो लोकसंगीत के संरक्षण और नवाचार का सुंदर उदाहरण बनी।

इसके साथ ही दूसरी भावनात्मक प्रस्तुति “ए सजनी हो… नारी से सजे घरवा” ने भी श्रोताओं को गहराई से छुआ। भोजपुरी धुन पर आधारित इस गीत में नारी के जीवन, उसके रिश्तों, त्याग, स्नेह और गरिमा को शब्दों की माला में पिरोया गया, जो नारी सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति बनकर उभरा।
कुल मिलाकर, ‘सारंग आर्ट एंड म्यूज़िक’ की यह प्रस्तुति लोकसंगीत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुई। राष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर गया के कलाकारों ने अपनी सशक्त पहचान दर्ज कराई, जिसे दर्शकों और आयोजकों दोनों ने भरपूर सराहना की।







