महताब अंसारी
गया। तीर्थ यात्रा पर निकले पंजाब के बुजुर्ग चमन लाल साथियों से बिछड़कर गलती से ट्रेन में सवार हो गए और करीब 1300 किलोमीटर दूर गया पहुंच गए। घर का पता याद नहीं था, सिर्फ अपने गांव का नाम उन्हें याद था।
गया रेलवे स्टेशन पर भटकते चमन लाल पर युवक नीरज की नजर पड़ी। नीरज उन्हें अपने घर ले गए, खाना खिलाया और चार दिनों तक अपने पास रखा। इसके बाद इंटरनेट और ChatGPT की मदद से उनके गांव फतेहगढ़ गुजरां का पता लगाया और बुजुर्ग को लेकर खुद पंजाब पहुंच गए।
माछीवाड़ा में जब पोते सुखचैन सिंह ने अपने दादा को सही-सलामत देखा तो वह भावुक होकर उनसे लिपटकर रो पड़ा। इसके बाद नीरज के पैर छूकर उनका धन्यवाद किया।
गया के नीरज ने साबित कर दिया कि इंसानियत की कोई सरहद नहीं होती। बिहार से पंजाब तक करीब 1300 किलोमीटर का यह सफर सिर्फ दूरी नहीं, बल्कि इंसानियत और भरोसे की ऐसी कहानी बन गया, जिसने पूरे गया का नाम रोशन कर दिया।







