गया: बिहार के गया जिले के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। फतेहपुर प्रखंड के जाने-माने चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र कुमार ‘राकेश’ को चिकित्सा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए लंदन स्थित ब्रिटिश संसद (Houses of Parliament) में विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
लंदन में लहराएगा बिहार का परचम
आगामी 10 अप्रैल को लंदन के ‘हाउसेस ऑफ पार्लियामेंट’ में आयोजित होने वाले ‘होलिस्टिक मेडिसिन कॉन्फ्रेंस 2026’ में डॉ. राघवेंद्र कुमार को मुख्य अतिथि और विशिष्ट पैनल के बीच सम्मान दिया जाएगा। यह सम्मान उन्हें चिकित्सा पद्धति होमियोपैथी में उनके निरंतर शोध और मरीजों की उत्कृष्ट सेवा के लिए दिया जा रहा है।
इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन The 1928 Institute (ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से संबद्ध) और India All-Party Parliamentary Group (APPG India) द्वारा किया जा रहा है। संस्था ने डॉ. कुमार के कार्यों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर सराहते हुए उन्हें ‘इन्वाइटेड डेलीगेट’ के तौर पर चुना है, जहाँ ब्रिटिश सांसद शिवानी राजा , बैरोनेस वर्मा और लॉर्ड रावल की उपस्थिति में उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा चयन
इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन The 1928 Institute (ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से संबद्ध) और India All-Party Parliamentary Group (APPG India) द्वारा किया जा रहा है। संस्था ने डॉ. कुमार के कार्यों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर सराहते हुए उन्हें ‘इन्वाइटेड डेलीगेट’ के तौर पर चुना है, जहाँ ब्रिटिश सांसद शिवानी राजा , बैरोनेस वर्मा और लॉर्ड रावल की उपस्थिति में उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
मरीजों का भरोसा और डॉ. कुमार की सेवा
डॉ. राघवेंद्र कुमार की पहचान केवल फतेहपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनकी कार्यकुशलता के कारण गया जिला सहित आसपास के कई जिलों से भी मरीज उनके पास इलाज के लिए खिंचे चले आते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहकर चिकित्सा की नई ऊंचाइयों को छूने वाले डॉ. कुमार ने यह साबित कर दिया है कि अगर सेवा का संकल्प हो, तो राहें खुद-ब-खुद अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँच जाती हैं।
फतेहपुर में खुशी का माहौल
जैसे ही यह खबर फैली कि फतेहपुर के डॉक्टर को ब्रिटिश पार्लियामेंट में सम्मान मिलने जा रहा है, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने इसे ‘गया की धरती का सम्मान’ बताया है। डॉ. कुमार का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि इससे पूरे बिहार के चिकित्सा जगत का नाम दुनिया भर में रोशन हुआ है।




