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गया: नवजात मृत्यु दर पर स्वास्थ्य विभाग सख्त; लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर गिरेगी गाज

On: Saturday, January 17, 2026 11:05 AM


गया | गया जिले में शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। शनिवार को जेपीएन अस्पताल परिसर स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की कलई भी खुली और भविष्य के लिए सख्त निर्देश भी जारी किए गए।

रेफरल सिस्टम में खामी: एंबुलेंस है, फिर भी रेफर क्यों नहीं?

बैठक के दौरान सिविल सर्जन डॉ. राजाराम प्रसाद ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि जिले के कई प्रखंडों से बीमार शिशुओं को मदर एंड नियोनेटल यूनिट (MNCU) और पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में रेफर नहीं किया जा रहा है। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि संसाधन होने के बावजूद जमीनी स्तर पर सक्रियता की कमी है। सिविल सर्जन ने दो टूक कहा, “जब एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था है, तो रेफरल संख्या कम क्यों है? यह सीधे तौर पर शिशु मृत्यु दर बढ़ने का बड़ा कारण बन सकता है। जिन प्रखंडों का प्रदर्शन खराब है, वहां के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मोहनपुर और फतेहपुर में ‘होम डिलीवरी’ की चुनौती

खोजी दृष्टि से देखें तो जिले के मोहनपुर और फतेहपुर प्रखंड स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में आज भी संस्थागत प्रसव (अस्पताल में जन्म) के बजाय घरों में प्रसव के मामले अधिक हैं, जो जच्चा-बच्चा दोनों की जान के लिए जोखिम भरा है। विभाग ने अब इन क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ‘होम बेस्ड न्यू बॉर्न केयर’ (HBNC) विजिट को शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

आंकड़ों की जुबानी: अप्रैल से दिसंबर 2025 का लेखा-जोखा

डीपीएम स्वास्थ्य नीलेश कुमार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट जिले में नवजात शिशुओं की नाजुक स्थिति को दर्शाती है:

  • कुल प्रसव: 54,982 (अप्रैल-दिसंबर 2025)
  • जीवित जन्म: 54,836
  • स्टिल बर्थ (मृत जन्म): 557 मामले
  • शिशु मृत्यु: 454 (HIMS रिपोर्ट के अनुसार)
  • कम वजन वाले बच्चे (LBW): 5,241 नवजात (2500 ग्राम से कम)
  • अति कम वजन: 570 नवजात (1800 ग्राम से भी कम)
    इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले में पैदा होने वाला हर 10वां बच्चा कम वजन का है, जिन्हें विशेष देखभाल और ‘ट्रांसपोर्ट इनक्यूबेटर’ जैसी सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता है।
    क्या है विभाग का ‘एक्शन प्लान’?
    शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित बिंदुओं पर अनिवार्य मुहर लगाई है:
  • ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट का उपयोग: रेफरल के दौरान नवजात को ‘ट्रांसपोर्ट इनक्यूबेटर’ में रखना अनिवार्य होगा ताकि रास्ते में संक्रमण या तापमान की समस्या न हो।
  • एमएनसीयू की सफलता: प्रभावती अस्पताल के MNCU वार्ड में भर्ती 957 नवजातों में से 837 को स्वस्थ कर घर भेजा गया, जो एक सकारात्मक संकेत है।
  • बुनियादी जांच: सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्स-रे, ईसीजी और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की यह सख्ती यदि धरातल पर उतरी, तो गया जिला न केवल शिशु मृत्यु दर में कमी लाएगा, बल्कि बिहार के लिए एक मॉडल के रूप में उभरेगा। हालांकि, मोहनपुर और फतेहपुर जैसे दुर्गम इलाकों में जागरूकता फैलाना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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