गयाजी में भव्य कॉरिडोर निर्माण की तैयारी तेज, 16 वेदियों की पौराणिकता रहेगी बरकरार और फल्गु के बीच लगेगी भगवान विष्णु की प्रतिमा।

मगध लाइव न्यूज़, गयाजी।
मोक्ष की नगरी गयाजी को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को गया के जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में विष्णुपद कॉरिडोर के विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में न केवल मंदिर के विस्तार पर चर्चा हुई, बल्कि गया की सदियों पुरानी विरासत को सहेजने के लिए भी कई कड़े निर्णय लिए गए। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि कॉरिडोर का निर्माण इस तरह हो कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं तो मिलें ही, साथ ही गयाजी की पौराणिक आत्मा भी सुरक्षित रहे।
पौराणिक वेदियों से कोई छेड़छाड़ नहीं और फल्गु के तट पर ही होगा पिंडदान
बैठक में सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय मंदिर की 16 वेदियों को लेकर लिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह के चारों ओर स्थित सभी 16 वेदियों को उनके मूल और यथावत स्वरूप में ही रखा जाएगा। इसके साथ ही, पिंडदान की सदियों पुरानी परंपरा को सम्मान देते हुए यह तय किया गया कि यह अनुष्ठान पूर्व की भांति फल्गु नदी के पवित्र तट पर ही संचालित होगा। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए नदी तट के पास व्यापक शेड और छायादार व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चिलचिलाती धूप में भी कर्मकांड सुगमता से संपन्न हो सकें।
विरासत भवनों का संरक्षण और शिजुआर धर्मशाला का नया स्वरूप
गया की ऐतिहासिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए बैठक में ‘शिजुआर धर्मशाला’ को एक हेरिटेज स्ट्रक्चर यानी विरासत संरचना के रूप में संरक्षित करने का प्रस्ताव पारित हुआ। सिर्फ यही नहीं, मंदिर के आसपास मौजूद अन्य ऐतिहासिक इमारतों की भी पहचान की जाएगी ताकि उन्हें आधुनिक निर्माण की भेंट चढ़ने से बचाया जा सके। प्रशासन का मानना है कि ये इमारतें गया के गौरवशाली इतिहास की गवाह हैं और इन्हें संवारना कॉरिडोर प्रोजेक्ट की प्राथमिकता है। इसके साथ ही, स्थानीय दुकानदारों और फेरीवालों के लिए एक व्यवस्थित पुनर्वास योजना तैयार की जाएगी ताकि किसी का रोजगार प्रभावित न हो और मंदिर क्षेत्र भीड़भाड़ से मुक्त रहे।
फल्गु के बीचों-बीच विराजेगी भगवान विष्णु की भव्य प्रतिमा
इस प्रोजेक्ट का सबसे आकर्षक हिस्सा फल्गु नदी के मध्य में प्रस्तावित भगवान विष्णुपद की एक विशाल पेडेस्टल प्रतिमा है। सीताकुंड बाईपास और मानपुर बाईपास के बीच नदी के बीचों-बीच इस प्रतिमा को स्थापित करने का विचार है, जो आने वाले पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगी। साथ ही, फल्गु नदी के जल को निर्मल और स्वच्छ बनाए रखने के लिए उसमें ‘एरेटर’ लगाए जाएंगे। इसके लिए परियोजना की परामर्शदाता संस्था एचसीपी डिजाइन (HCP Design) को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी कार्ययोजना में जल शोधन और स्वच्छता को प्रमुखता से शामिल करें।
विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा पूरा परिसर
विष्णुपद कॉरिडोर सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सुविधाओं का एक पूरा जाल होगा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए यहां उन्नत कैस्केड लाइटिंग, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), और भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी निगरानी, पुलिस स्टेशन और फायर स्टेशन की व्यवस्था होगी। इसके अलावा सीताकुंड, मंगलागौरी और अक्षयवट को भी इस कॉरिडोर के अहम हिस्सों के रूप में जोड़ा जाएगा। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि गया की धार्मिक गरिमा से समझौता किए बिना इस विश्वस्तरीय तीर्थ क्षेत्र का विकास समय सीमा के भीतर पूरा करने की कोशिश की जाएगी।






