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बापू टावर में ‘मगही महोत्सव’ का भव्य समापन: विरासत और कला के संगम ने जीता अतिथियों का दिल

On: Sunday, March 29, 2026 9:13 PM

पटना| बिहार की राजधानी पटना के नवनिर्मित बापू टावर में आयोजित दो दिवसीय ‘मगही महोत्सव’ का समापन आज हर्षोल्लास के साथ हो गया। मगध की समृद्ध भाषा, संस्कृति और कला को समर्पित इस महोत्सव ने न केवल बौद्धिक विमर्श को मंच दिया, बल्कि कला और संगीत के माध्यम से मगध की गौरवगाथा को भी जीवंत कर दिया।

तस्वीरों में दिखी मगध की जीवंत विरासत

महोत्सव का मुख्य आकर्षण गया और पटना के प्रतिष्ठित छायाकारों द्वारा लगाई गई भव्य प्रदर्शनी रही। गया के वरिष्ठ कलाकार-छायाकार रूपक सिन्हा और पटना के जितेन्द्र कुमार जीतू की तस्वीरों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कहा, “ये तस्वीरें महज चित्र नहीं, बल्कि जीवंत अनुभव हैं। मगध की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को जिस बारीकी से कैद किया गया है, वह हमारी समृद्धि की गाथा स्वयं बयां करती हैं।

“सुरों से सजा मगध का आंगन

महोत्सव के दौरान ‘गया घराना’ की शास्त्रीय और लोक परंपरा की गूँज सुनाई दी। वरिष्ठ कलाकार राजन सिजुआर, पंडित सतीश शर्मा और दिनेश मौआर ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कलाकारों ने संकल्प लिया कि संगीत के क्षेत्र में गया घराने को नई ऊंचाइयों पर ले जाना ही उनकी सच्ची साधना होगी।

मगही भाषा के उत्थान पर मंथन

महोत्सव के विभिन्न सत्रों में विद्वानों और साहित्यकारों ने मगही भाषा के भविष्य पर गंभीर चर्चा की। कार्यक्रम की मुख्य मांगें और निष्कर्ष निम्नलिखित रहे:

  • अनिवार्य शिक्षा: वक्ताओं ने मांग की कि मगही भाषा को सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
  • आम बोलचाल पर जोर: देश-विदेश से आए मगध वासियों ने अपील की कि हम अपनी मातृभाषा में नि:संकोच संवाद करें।
  • सांस्कृतिक संवर्धन: मगही फिल्मों के प्रचार-प्रसार और लोक गायन के माध्यम से युवा पीढ़ी को जोड़ने पर बल दिया गया।

प्रशासनिक और बौद्धिक जगत की उपस्थिति

कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजक रवि शंकर उपाध्याय, विजेता चंदेल और डॉ. उज्जवल कुमार सिंह ने विभिन्न सत्रों के माध्यम से किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कुमार रवि, बापू टावर के निदेशक विनय कुमार, साहित्यकार निराला विदेसिया, और सुशील कुमार (IPS) सहित कई गणमान्य पत्रकार, बुद्धिजीवी और कलाकार उपस्थित रहे।

दो दिवसीय मगही महोत्सव ने यह स्पष्ट कर दिया कि अपनी जड़ों की ओर लौटना ही संस्कृति को जीवित रखने का एकमात्र विकल्प है। कलाकारों की कूची से लेकर गायकों के सुरों तक, मगध की विरासत पटना के बापू टावर में पूरी आभा के साथ मुस्कुराती नजर आई।

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