पाठकों की कलम से
✍️पाठकों की कलम से: क्रांति से दफ्तर तक: एक ‘स्थगित क्रांतिकारी’ की दास्तां
✍️अंकुर रंजनचांद चौरा गया, बिहार चलिए एक नौकरीपेशा व्यक्ति की क्रांतिकारिता के सफ़र का बखान करता हूँ. 2021 में नीलोत्पल मृणाल की किताब “औघड़” को....
पाठकों की कमल से✍️ : आज़ादी नहीं, ‘मालिक’ बनने की भूख: क्या हम गुलामी के अंतहीन चक्र में फंसे हैं?
”अक्सर हम सोचते हैं कि शोषण का शिकार व्यक्ति न्याय और समानता की तलाश में होगा, लेकिन मनोविज्ञान का एक स्याह पक्ष कुछ और ही....







