
समस्तीपुर से मुकेश कुमार की रिपोर्ट:
कच्ची दीवारें, टपकती छत और हर दिन दो वक्त की रोटी की जद्दोजहद। पिछले पांच सालों में 17 वर्षीय नेहा कुमारी, 12 वर्षीय मुन्ना कुमार और 9 वर्षीय अजय कुमार ने जिंदगी का वह खौफनाक मंजर देखा है, जो किसी भी इंसान की रूह कंपा दे। माता-पिता का साया सिर से उठने के बाद इन तीन मासूमों का बचपन बेबसी के अंधेरे में कहीं खो गया था। लेकिन, मंगलवार का दिन इन अनाथ बच्चों के जीवन में एक ऐसा चमत्कार लेकर आया, जिसने इनकी अंधियारी दुनिया को पूरी तरह से रोशन कर दिया।
संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से संचालित ‘मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट’ द्वारा इन बेसहारा बच्चों को एक सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान बनाकर सौंपा गया है। इस नवनिर्मित आशियाने को ‘समर्थ का कबीर के सुदामा का महल’ का नाम दिया गया है।
4 महीने के सहयोग के बाद मिला स्थायी आशियाना

मगध लाइव की पड़ताल में सामने आया कि ‘मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट’ का इन बच्चों से यह कोई एक दिन का जुड़ाव नहीं है। भूख और बेबसी की कगार पर पहुंच चुके इन मासूमों को पिछले चार महीने से संस्था की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत लगातार राशन, कपड़े और जीवन-यापन की अन्य जरूरी सामग्री मुहैया कराई जा रही थी। उन्हें भुखमरी से उबारने के बाद, ट्रस्ट ने उनके लिए एक स्थायी आशियाने का निर्माण शुरू करवाया, जो अब पूर्ण रूप से तैयार होकर उनके हाथों में सौंप दिया गया है। घर में नए बेड, गद्दे, रजाई, नए बर्तन, कपड़े और महीने भर का राशन भी दिया गया है।
भावुक कर देने वाले बयान: “अनाथों को मिल गए दीनानाथ”
इस मौके पर घर की चाबी सौंपते समय बच्चों और वहां मौजूद गणमान्य लोगों की आंखें छलक उठीं। मौके पर जो भावनाएं व्यक्त की गईं, वे सीधे दिल को छू लेने वाली थीं:

“माता-पिता की कमी पूरी कर दी” – नेहा कुमारी (17 वर्ष) घर की चाबी पाकर भावुक हुई बड़ी बहन नेहा ने भरे गले से कहा, “पिछले चार महीनों से जब से संत रामपाल जी महाराज ने हम भाई-बहनों को गोद लिया है, हमारी सारी चिंता दूर कर दी है। माता-पिता तो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मुझे संत रामपाल जी के रूप में जो प्यार और आशीर्वाद मिला है, उसने मेरे इस दुख को भी भुला दिया है।”

“इन बच्चों को सच में दीनानाथ मिल गए” – जिला पार्षद मौके पर मौजूद जिला पार्षद सत्य प्रकाश कुशवाहा ने रुंधे गले से कहा, “संत रामपाल जी महाराज ने मानवता का जो यह बेमिसाल कार्य किया है, उसके लिए समस्तीपुर जिले की ओर से उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद और प्रणाम। आज इन तीन अनाथ बच्चों को सच में दीनानाथ मिल गए हैं, जिन्होंने न केवल इनके बचपन को बचाया, बल्कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित और सुनहरा बनाने का काम किया है।”

“यह आम इंसान के वश की बात नहीं” – सूरजमल (कपड़ा व्यवसायी) समस्तीपुर के मशहूर कपड़ा व्यवसायी सूरजमल ने इस निस्वार्थ सेवा को देखकर कहा, “इस तरह की मदद आज तक मैंने कभी नहीं देखी है कि कोई संत बेबस, लाचार और असहाय लोगों को ढूंढकर उनके जीवन को सुखों से भर रहा हो। संत रामपाल जी महाराज साक्षात ईश्वर के रूप हैं, क्योंकि ऐसा कार्य किसी आम इंसान के वश की बात नहीं है।”
तस्वीर पर पुष्प माला अर्पित कर महिलाओं ने किया नमन

इस ईश्वरीय कार्य से अभिभूत मोरसंड मालपुर गांव की महिलाओं और उपस्थित जनप्रतिनिधियों का हृदय कृतज्ञता से भर उठा। उन्होंने श्रद्धापूर्वक संत रामपाल जी महाराज की तस्वीर पर पुष्प माला अर्पित की और पारंपरिक रूप से अंग वस्त्र भेंट कर अपना गहरा सम्मान व आभार प्रकट किया। महिलाओं की आंखों में सुकून था कि अब उनके गांव के इन अनाथ बच्चों को सर्दी-गर्मी या बरसात में बेबसी के आंसू नहीं रोने पड़ेंगे।
बिहार में बन चुका है ऐसा चौथा ‘सुदामा का महल’
बिहार राज्य सेवादार नागेंद्र दास ने बताया कि ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का उद्देश्य ही यही है कि कोई भी परिवार भूख से न मरे। पूरे बिहार में ऐसे असहाय परिवारों को अब तक चार पक्के मकान ट्रस्ट की ओर से बनाकर दिए जा चुके हैं। और दर्जनों मकान बनाए जा रहे हैं। सहयोगी सेवादार सुशांत दास ने स्पष्ट किया कि जब तक ये बच्चे पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते, संस्था हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहेगी।
सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में हुआ गृह प्रवेश

इस हृदयस्पर्शी अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि पवन कुमार पथिक, सरपंच प्रतिनिधि रणजीत कुमार, किराना व्यापारी सुनील अग्रवाल, समस्तीपुर जिला सेवादार नागेश्वर दास, रमाशंकर दास, सतीश महतो, सूरज दास, राजकुमार पासवान, अशरफी पासवान, सुनील दास, ललित दास, महेंद्र दास, रौशन दास और ब्रजेश दास ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में कृष्णा दास, अशोक दास, प्रवीण दास, सुशील दास, अजय दास और सुजीत दास समेत सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।







