
मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | गयाजी
मोक्षदायिनी गया जी की पवित्र भूमि पर आयोजित विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 2026 इस बार एक नए अवतार में नजर आ रहा है। सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के साथ आधुनिक तकनीक का यह अनूठा संगम देश-विदेश से आने वाले लाखों सनातन श्रद्धालुओं के अनुभव को सुरक्षित और सुगम बना रहा है। गया सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कृषि मंत्री सह गया जिला के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मेले की भव्य तैयारियों और नागरिक सुविधाओं का पूरा ब्योरा मीडिया के सामने रखा। जुलाई माह से जारी प्रशासनिक तैयारियों के बाद अब मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा, आवासन, पेयजल और परिवहन के व्यापक इंतजाम जमीन पर उतार दिए गए हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निगरानी और अपनों से मिलाने को ‘क्यूआर कोड’

सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के मोर्चे पर इस बार बिहार सरकार ने कई आधुनिक प्रयोग किए हैं। मेला क्षेत्र में अक्सर अपनों से बिछड़ने वाले बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष ‘क्यूआर कोड युक्त रिस्ट बैंड’ पहनाए जा रहे हैं। इस बैंड में परिजनों के मोबाइल नंबर दर्ज रहेंगे और बिछड़ने की स्थिति में तत्काल एसएमएस अलर्ट चला जाएगा। इसके साथ ही पूरे शहर में विधि-व्यवस्था बनाए रखने और अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल हो रहा है। यह तकनीक न केवल भीड़ का लोकेशन अलर्ट भेजेगी, बल्कि चेहरे की पहचान प्रणाली से गुमशुदा लोगों को तुरंत तलाशने में भी मदद करेगी।
Google Translator से हटेगी भाषाई बाधा, कला से निखरी ‘गया जी’ की दीवारें
देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी हेल्प डेस्क को ‘गूगल ट्रांसलेटर’ तकनीक से लैस किया गया है, ताकि भाषा की रुकावट खत्म हो सके और श्रद्धालु अपनी मातृभाषा में जानकारी प्राप्त कर सकें। वहीं दूसरी ओर ‘कायाकल्प अभियान’ के तहत गया शहर के सौंदर्यीकरण में स्थानीय स्कूली बच्चों को भागीदार बनाया गया है। शहर की सार्वजनिक दीवारों पर बच्चों द्वारा बनाई गई भगवान विष्णु और सनातन संस्कृति से जुड़ी मनोरम कलाकृतियां श्रद्धालुओं का मन मोह रही हैं।
निःशुल्क आवासन, शुद्ध जल और मात्र 30 रुपये में जीविका का सात्विक भोजन

श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रतिदिन 75 हजार से अधिक लोगों के निःशुल्क ठहरने का इंतजाम किया गया है। मेला क्षेत्र में सैकड़ों नए शौचालयों, स्नानागारों और चेंजिंग रूम के साथ-साथ शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए पीएचईडी लैब द्वारा रोजाना पानी की गुणवत्ता जांच की जा रही है। दूर-दराज़ से आने वाले लोगों के लिए 150 निःशुल्क ई-रिक्शा और स्वास्थ्य सेवाओं हेतु 70 से अधिक कैंपों में डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है। इसके अतिरिक्त, जीविका दीदियों के सहयोग से श्रद्धालुओं को मात्र 30 रुपये में पौष्टिक एवं उच्च कोटि का सात्विक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि हर श्रद्धालु गया जी से एक सुखद व स्मरणीय अनुभव लेकर लौटे।







