बेलागंज: बिहार में अवैध खनन के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई हुई है। खनन विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने श्रीपुर बाजार में छापेमारी कर अवैध बालू खनन से जुड़े एक हाईटेक जालसाजी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में गिरोह का मुख्य सरगना रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है, जो ऑनलाइन सेंटर की आड़ में फर्जी चालान का काला कारोबार चला रहा था।
ऑनलाइन सेंटर से संचालित हो रहा था फर्जीवाड़े का खेल
खनन निरीक्षक नवीन कुमार के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी ने अवैध बालू व्यापार के नए पैंतरे का खुलासा किया है। श्रीपुर बाजार स्थित एक ऑनलाइन सेंटर पर जब विभाग ने दबिश दी, तो वहां वैध चालान के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। जांच में पाया गया कि सेंटर का संचालक योगेंद्र कुमार, जो सिमरा गांव का निवासी है, तकनीकी कौशल का इस्तेमाल कर असली चालान को एडिट करता था और उसे हूबहू असली दिखने वाले फर्जी बालू चालान में बदल देता था।
मात्र 200 रुपये में बेचा जा रहा था सरकार को धोखा
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी योगेंद्र कुमार ने स्वीकार किया कि वह अवैध रूप से बालू ले जा रहे वाहन चालकों को मात्र 200 रुपये में फर्जी चालान उपलब्ध कराता था। इन फर्जी कागजातों के सहारे बालू माफिया पुलिस और प्रशासन की जांच से बचने का प्रयास करते थे। आरोपी के पास मौजूद कंप्यूटर और मोबाइल में कई ऐसे संदिग्ध एप्लिकेशन मिले हैं, जिनका उपयोग केवल एडिटिंग और जालसाजी के लिए किया जाता था। मौके से पुलिस ने फल्गु बालू घाट के ब्लॉक नंबर-9 से संबंधित भारी मात्रा में जाली दस्तावेज बरामद किए हैं।
पुलिस ने जब्त किए तकनीकी उपकरण और जाली मुहरें
छापेमारी के दौरान बेलागंज पुलिस ने मौके से अपराध में प्रयुक्त भारी मात्रा में सामान जब्त किया है। बरामद किए गए सामानों में एक सीपीयू, मॉनिटर, आधुनिक प्रिंटर, स्मार्टफोन और कई फर्जी रबर स्टैंप (मुहरें) शामिल हैं। इन मुहरों का उपयोग चालान को आधिकारिक रूप देने के लिए किया जाता था। थानाध्यक्ष मनोज कुमार पांडे ने बताया कि खनन विभाग की लिखित शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आरोपी को जेल भेजने की तैयारी पूरी है।
खनन माफियाओं के नेटवर्क पर प्रशासन की कड़ी नजर
इस गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र के अन्य अवैध बालू कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस ऑनलाइन सेंटर से और कौन-कौन से वाहन मालिक जुड़े हुए थे। विभाग का मानना है कि इस तरह के फर्जीवाड़े से सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा था, जिसकी भरपाई के लिए अब भविष्य में भी ऐसी औचक छापेमारी जारी रहेगी।





