मगध लाइव न्यूज़ संवाददाता | बेलागंज
मगध की उर्वर माटी ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर अपनी मेधा का परचम लहराया है। बेलागंज प्रखंड क्षेत्र के सिंघौल गांव निवासी अवधेश शर्मा के पुत्र डॉ. अजय कुमार को स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर द्वारा जारी दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। उनकी इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल सिंघौल गांव बल्कि पूरे बेलागंज और मगध क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीण और प्रखंडवासी अपने लाल की इस सफलता पर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर, इज़राइल तक गाड़े सफलता के झंडे डॉ. अजय कुमार की सफलता की कहानी ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच से शुरू होकर वैश्विक ऊंचाइयों तक पहुँचने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बेलागंज के अग्रवाल उच्च विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी से अपनी पीएच.डी. की उपाधि हासिल की। अपने वैज्ञानिक अनुसंधानों को नई दिशा देते हुए डॉ. कुमार ने वर्ष 2018 से 2022 तक इज़राइल स्थित कृषि अनुसंधान संगठन (वोल्कानी सेंटर) में विजिटिंग साइंटिस्ट के रूप में काम किया। वर्तमान में वे नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं और एक प्रख्यात शोधकर्ता एवं वैज्ञानिक संपादक के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके हैं।
कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में दे रहे हैं बहुमूल्य योगदान एक वैज्ञानिक के तौर पर डॉ. कुमार का मुख्य फोकस टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण पर रहा है। उन्होंने पादप–सूक्ष्मजीव अंतःक्रिया, सूक्ष्मजीव जैव-प्रौद्योगिकी, पादप माइक्रोबायोम और सतत कृषि जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय शोध किए हैं। उनका वर्तमान अनुसंधान बहु-ओमिक्स माइक्रोबायोम इंजीनियरिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित है। इन आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोणों का उपयोग करते हुए वे कृषि और पर्यावरण के सामने आने वाली वैश्विक चुनौतियों का नवीन और स्थायी समाधान खोजने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
शोध और प्रकाशन की दुनिया में मनवाया अपना लोहा वैज्ञानिक साहित्य और अकादमिक प्रकाशन के क्षेत्र में भी डॉ. अजय कुमार का योगदान अद्वितीय है। अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित सहकर्मी-समीक्षित शोध पत्रिकाओं में उनके 145 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 60 से अधिक वैज्ञानिक पुस्तकों का संपादन किया है और 150 से अधिक पुस्तक अध्यायों में अपना अमूल्य योगदान दिया है। वे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिकाओं के संपादकीय बोर्ड के अहम सदस्य भी हैं। वैज्ञानिक गुणवत्ता को बनाए रखने और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने में उनके इसी समर्पण ने आज उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है।







