पाठकों की कलम से
✍️पाठकों की कलम से: नयन भरे जल प्रियतम के, बादल भरे जल वारि
नयन भरे जल प्रियतम के,बादल भरे जल वारि।ख़्याल भरे कजरारे नैना,विरह सहे सुकुमारी।l झुकी पलक पर यादों का पहरा,साँसें जैसे थमी हुई हैं।धड़कन में है....
✍️पाठकों की कलम से: क्रांति से दफ्तर तक: एक ‘स्थगित क्रांतिकारी’ की दास्तां
✍️अंकुर रंजनचांद चौरा गया, बिहार चलिए एक नौकरीपेशा व्यक्ति की क्रांतिकारिता के सफ़र का बखान करता हूँ. 2021 में नीलोत्पल मृणाल की किताब “औघड़” को....
पाठकों की कमल से✍️ : आज़ादी नहीं, ‘मालिक’ बनने की भूख: क्या हम गुलामी के अंतहीन चक्र में फंसे हैं?
”अक्सर हम सोचते हैं कि शोषण का शिकार व्यक्ति न्याय और समानता की तलाश में होगा, लेकिन मनोविज्ञान का एक स्याह पक्ष कुछ और ही....
पाठकों की कलम से: गया शहर विधानसभा में कांग्रेस-राजद या भाजपा… किसका होगा दबदबा?
✍️अंकुर रंजन चाँद चौरा, गया बिहार गया शहर विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति का अहम केंद्र माना जाता है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब....









