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बिहार में फर्जी RTPS आवेदनों का सिलसिला जारी: गया में ‘बुलेट’ और ‘हवाझुझ’ नाम से फर्जी एप्लीकेशन पकड़े गए

On: Saturday, August 30, 2025 4:23 PM

कई जिलों में इसी तरह के मामले सामने आए, सरकारी सिस्टम की विश्वसनीयता पर उठे सवाल; जांच तेज

गया: बिहार में लोक सेवाओं के अधिकार (RTPS) काउंटरों पर फर्जी और हास्यास्पद नामों से आवेदन दाखिल करने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला गया जिले के डोभी अंचल कार्यालय से सामने आया है, जहां दो संदिग्ध आवेदनों को समय रहते पकड़ लिया गया। इन आवेदनों में विचित्र नामों का इस्तेमाल किया गया था, और साक्ष्य के रूप में असंबंधित फोटो अपलोड की गई थीं। अधिकारियों का मानना है कि इनका मकसद सरकारी प्रक्रियाओं को बदनाम करना और कामकाज में बाधा डालना है।

पहला आवेदन 15 अगस्त 2025 को दाखिल किया गया था। इसमें आवेदक का नाम ‘बुलेट’, पिता का नाम ‘फॉर्चुनर’ और माता का नाम ‘डिफेंडर’ दर्ज था। आवेदक ने अपना पता कोठवारा गांव, पचरतन पंचायत बताया था। साक्ष्य के तौर पर रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल की फोटो लगाई गई थी। दूसरा आवेदन 19 अगस्त 2025 का है, जिसमें आवेदक का नाम ‘हवाझुझ’, पिता का नाम ‘किसी क्विज’ और माता का नाम ‘भाव क्विज’ लिखा गया था। पता मुसेहना वार्ड नंबर 7, कुरमांवा पंचायत दिया गया था। इस आवेदन में कुशल युवा कार्यक्रम के एक विज्ञापन की फोटो अपलोड की गई थी।

राजस्व कर्मचारियों की जांच में दोनों आवेदन पूरी तरह फर्जी पाए गए। डोभी के अंचल अधिकारी (सीओ) ने बताया कि ये आवेदन जानबूझकर गलत मंशा से दाखिल किए गए थे, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदकों और संलिप्त व्यक्तियों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, डोभी थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे फर्जी प्रयास डिजिटल गवर्नेंस को कमजोर करते हैं और चुनावी मौसम में राजनीतिक साजिश का हिस्सा भी हो सकते हैं।

यह घटना बिहार में हाल के दिनों में सामने आए फर्जी RTPS आवेदनों की श्रृंखला का हिस्सा है। जुलाई-अगस्त 2025 में कई जिलों में इसी तरह के मामले दर्ज किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, पटना में ‘डॉग बाबू’ नाम से आवेदन दाखिल किया गया था, जिसमें एक कुत्ते की फोटो लगाई गई थी। इसी तरह, रोहतास जिले में ‘कैट कुमार’ नाम से रेसिडेंशियल सर्टिफिकेट के लिए आवेदन आया, जहां आवेदक को ‘कैटी बॉस’ का पुत्र बताया गया था। समस्तीपुर में तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम और फोटो से फर्जी आवेदन दाखिल किया गया, जिसके बाद FIR दर्ज हुई।

अन्य मामलों में नवादा जिले में ‘डोगेश बाबू’, पूर्वी चंपारण में ‘सोनालिका ट्रैक्टर’, और मोदनगंज ब्लॉक में ‘सैमसंग’ नाम से आवेदन सामने आए, जहां माता-पिता के नाम ‘आईफोन’ बताए गए थे। इसके अलावा, ‘श्री राम’, ‘कव्वा सिंह’ और ‘मैना देवी’ जैसे नामों से भी फर्जी आवेदन दर्ज हुए। इनमें से ज्यादातर मामलों में FIR दर्ज की गई है, और अधिकारियों ने साइबर फ्रॉड की जांच शुरू की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये आवेदन ऑनलाइन सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर दाखिल किए जा रहे हैं, संभवतः चुनाव से पहले विपक्षी दलों की छवि खराब करने या सिस्टम पर सवाल उठाने के लिए। बिहार सरकार ने सभी जिलों में RTPS काउंटरों पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि ऐसे फर्जी प्रयासों को रोका जा सके। मामले की जांच जारी है, और जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद है।

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