मगध अपडेट बिहार राजनीति क्राइम शिक्षा खेल नौकरी धर्म

माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की ज्यादतीः दो किस्तें न चुका पाने पर गाली-गलौज, महिला ने खाया ज़हर

On: Tuesday, December 10, 2024 3:26 PM

गया। बिहार के ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहे माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के मकड़जाल ने एक और जिंदगी लील ली। मेडिकल थाना क्षेत्र के मोर मर्दाना पंचायत के श्री सानीचक गांव में किस्त न चुका पाने के कारण माइक्रोफाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों की बदसलूकी से आहत एक महिला, सुगिया देवी, ने ज़हर खा लिया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

बेटे की शादी के लिए लिया था लोन

मृतका के परिजन

मृतका के बेटे रोहित चौधरी के मुताबिक, उसने अपनी बहन की शादी के लिए कंपनी से तीन लाख रुपये का लोन लिया था। आधे से ज्यादा राशि चुका दी गई थी, लेकिन किसी कारणवश पिछली दो किस्तें समय पर जमा नहीं हो पाई थीं। रोहित ने बताया कि वह ड्राइवर है और घटना के समय ड्यूटी पर था। कंपनी के कर्मचारियों ने फोन कर तुरंत किस्त जमा करने का दबाव बनाया। शाम तक पैसे देने का वादा करने के बावजूद कर्मचारी उनके घर पहुंच गए और मां के साथ दुर्व्यवहार किया।

गाली-गलौज से आहत होकर उठाया आत्मघाती कदम

कंपनी के कर्मचारियों ने सुगिया देवी के साथ गाली-गलौज की और उन्हें अपमानित किया। यह घटना गांव वालों के सामने हुई, जिससे मानसिक दबाव में आकर उन्होंने ज़हर खा लिया। परिजनों का कहना है कि मां अपने अपमान को सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने यह दुखद कदम उठाया।

ग्रामीणों में आक्रोश

घटना के बाद से गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियां गरीबों पर अनावश्यक दबाव बनाती हैं और छोटी-छोटी देरी पर अपमानजनक व्यवहार करती हैं। मृतका के पति रघुवीर चौधरी ने कहा, “कंपनी ने केवल दो किस्तों की देरी पर ऐसा रवैया अपनाया, जबकि आधे से अधिक लोन चुका दिया गया था। यह पूरी तरह से अनुचित है।”

पुलिस ने शुरू की जांच

मेडिकल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

माइक्रोफाइनेंस कंपनियों का बढ़ता आतंक

पिछले कुछ सालों में बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों ने तेजी से अपना जाल बिछाया है। कम ब्याज का लालच देकर ये कंपनियां 26% से 36% तक ऊंची ब्याज दरों पर लोन उपलब्ध कराती हैं। समय पर किस्त न चुका पाने पर इन कंपनियों के वसूली एजेंट अक्सर दुर्व्यवहार और धमकी जैसे तरीकों का सहारा लेते हैं।

सवाल खड़े करता है यह मामला

सुगिया देवी की मौत ने एक बार फिर माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की मनमानी और गरीबों पर पड़ने वाले असर को उजागर कर दिया है। क्या सिर्फ दो किस्तें न चुकाने पर किसी को अपमानित करना जायज है? इस मामले ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और इन कंपनियों के कामकाज के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment

📰 Latest:
बेलागंज में अवैध बालू खनन पर प्रशासन का बड़ा प्रहार: तीन ट्रैक्टर जब्त, एक गिरफ्तार; 51 लाख का जुर्माना | गया सोना लूटकांड: निलंबित रेल थानाध्यक्ष की जमानत पर कल होगी सुनवाई, करोड़ों के सोने की लूट में फंसे हैं ‘खाकी’ वाले | हावड़ा-आनंद विहार के बीच दौड़ेगी अत्याधुनिक ‘अमृत भारत’ एक्सप्रेस, धनबाद-गया के रास्ते 22 जनवरी से शुरू होगा नियमित परिचालन | क्या आपके पास है गयाजी को बेहतर बनाने का आइडिया? नगर निगम के साथ साझा करें अपने विचार, स्कैन करें क्यूआर कोड | ✍️पाठकों की कलम से: क्रांति से दफ्तर तक: एक ‘स्थगित क्रांतिकारी’ की दास्तां | सोना लूटकांड: रक्षक ही बने भक्षक; आधी हकीकत, आधा फसाना और पुलिस की साख पर दाग | बिहार दरोगा परीक्षा को लेकर गया रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय | बिहार पुलिस अवर निरीक्षक परीक्षा को लेकर गया में तैयारियां पूर्ण, 17 केंद्रों पर जिला प्रशासन की पैनी नजर | गया में अवैध बालू खनन पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई: 24 ट्रैक्टर जब्त, 1.33 करोड़ का जुर्माना, माफियाओं में हड़कंप | गया: नवजात मृत्यु दर पर स्वास्थ्य विभाग सख्त; लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर गिरेगी गाज |