मगध लाइव न्यूज़ डेस्क | अरवल
बिहार पुलिस की छवि को धूमिल करने वाले एक गंभीर मामले में मगध क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) विकास वैभव ने बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। अरवल थाने के पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष दरबारी चौधरी को अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने एक विशेष छापामारी के दौरान चार लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा और कथित रूप से अवैध वसूली के बाद उन्हें छोड़ दिया। खाकी वर्दी पर लगे इस संगीन दाग के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
ई-मेल से खुली थानेदार की पोल
अरवल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक ई-मेल के जरिए इस पूरे मामले की सनसनीखेज शिकायत मिली थी। शिकायत में बताया गया था कि 22 और 23 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात को थानाध्यक्ष दरबारी चौधरी ने हरियाणा के तीन और अरवल के एक व्यक्ति को पकड़कर थाने लाया। आरोप है कि इन सभी को बिना किसी कानूनी अधिकार के 12 घंटों तक अवैध रूप से थाने में निरुद्ध रखा गया और परिजनों से उनका संपर्क भी नहीं होने दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तुरंत अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) से इसकी गहन जांच करवाई। एसडीपीओ की जांच रिपोर्ट में चारों व्यक्तियों को 12 घंटे तक अकारण गैरकानूनी हिरासत में रखने और बिना उचित जांच के छोड़ देने के आरोप बिल्कुल सत्य पाए गए।
आईजी का सख्त एक्शन और शुरू हुई विभागीय कार्रवाई
एसडीपीओ की जांच रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद अरवल एसपी ने मगध क्षेत्र (गयाजी) के पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव से थानाध्यक्ष के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की। जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद आईजी ने थानाध्यक्ष दरबारी चौधरी के इस कृत्य को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता का द्योतक मानते हुए उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया। आईजी ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के भी सख्त आदेश दिए हैं और निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय अरवल पुलिस केंद्र निर्धारित किया गया है। आईजी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग में पारदर्शिता और विधिसम्मत कार्यप्रणाली सर्वोच्च प्राथमिकता है, और मनमानी करने वाले किसी भी पुलिस पदाधिकारी पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।







