गया (मगध लाइव डेस्क)। मगध प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) विकास वैभव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके इलाके में कानून से खिलवाड़ करने वालों की खैर नहीं, चाहे वह आम अपराधी हो या फिर खाकी वर्दी में बैठा कोई रक्षक। अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के लिए विख्यात आईजी विकास वैभव ने गया जिले के पंचानपुर थाने में हुए एक अत्यंत शर्मनाक प्रकरण में त्वरित और कठोर कार्रवाई करते हुए पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। एक नाबालिग से दुष्कर्म जैसे अति-संवेदनशील मामले में घोर लापरवाही बरतने पर आईजी ने कड़ा रुख अपनाते हुए थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिस पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
दागियों पर गिरी गाज, नपे तीन पुलिस पदाधिकारी
आईजी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कर्तव्य के प्रति लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता के आरोप में प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर तीन पुलिस पदाधिकारियों पर सीधे गाज गिरी है। निलंबित होने वाले पुलिसकर्मियों में पंचानपुर थाना के थानाध्यक्ष और पुलिस अवर निरीक्षक पद्माकर उपाध्याय, प्रभारी थानाध्यक्ष नगिना उराँव तथा सहायक अवर निरीक्षक संतोष कुमार शामिल हैं। इन तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय पुलिस केन्द्र, गया निर्धारित किया गया है और इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का कड़ा निर्देश भी दे दिया गया है।
रक्षक ही बने भक्षक के मददगार, थानेदार की शर्मनाक करतूत
यह सनसनीखेज मामला 10 अगस्त 2026 को तब सामने आया, जब एक बेबस मां ने मगध आईजी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। पीड़िता की मां के अनुसार, 6 अगस्त 2026 की दोपहर उनकी नाबालिग बेटी बाजार गई थी और लौटकर नहीं आई, जिसके बाद 7 अगस्त को वह डरी-सहमी और बदहवास हालत में घर लौटी। पूछताछ में बच्ची ने बताया कि पंचानपुर के ही रहने वाले नीरज कुमार ने उसे डरा-धमकाकर अपने घर ले जाकर रात भर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब पीड़िता की मां नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने पंचानपुर थाने पहुंची, तो पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पुलिस ने 8 अगस्त को आरोपी नीरज कुमार को बाजार से पकड़कर थाने लाया, लेकिन बिना एफआईआर दर्ज किए उसे पूरी रात थाने में रखा और अगले दिन 9 अगस्त को कथित तौर पर पैसे लेकर छोड़ दिया। हद तो तब हो गई, जब आरोपी को थाने लाने और उसे छोड़ने के संबंध में थाना दैनिकी (स्टेशन डायरी) में कोई प्रविष्टि तक नहीं की गई। इतने गंभीर मामले में आईजी के हस्तक्षेप से पहले पुलिस ने न तो प्राथमिकी दर्ज की और न ही वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी।
विकास वैभव का कड़ा संदेश: न्याय में शिथिलता बर्दाश्त नहीं
आईजी विकास वैभव ने इस कृत्य को अत्यंत गंभीर और आपत्तिजनक माना है। उन्होंने अपनी कार्यशैली का लोहा मनवाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि बलात्कार जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, विधिक प्रक्रिया की अनदेखी या प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा, निष्पक्ष अनुसंधान और न्याय सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आईजी ने गया के वरीय पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि इस प्रकरण में सभी आवश्यक विधिसम्मत कार्रवाई तत्काल और निष्पक्ष रूप से सुनिश्चित कराई जाए और अनुसंधान का प्रभावी पर्यवेक्षण किया जाए। आईजी के सख्त दखल के बाद अब अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा थाना पहुंचकर मामले की समीक्षा की गई है और प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सुशासन की मिसाल बनी आईजी की कार्यशैली
मगध प्रक्षेत्र में आईजी विकास वैभव की यह कार्रवाई महज एक निलंबन का आदेश नहीं, बल्कि भ्रष्ट और लचर व्यवस्था के खिलाफ एक जोरदार हंटर है। फाइलों में उलझने के बजाय सीधे जमीनी हकीकत पर प्रहार करने की उनकी इस नीति ने आम जनता में पुलिस के प्रति फिर से विश्वास जगाया है। उनका स्पष्ट संदेश है कि खाकी वर्दी की आड़ में पीड़ितों की आवाज दबाने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के लिए उनके सिस्टम में कोई जगह नहीं है। मगध की जनता अब राहत की सांस ले सकती है, क्योंकि जब तक विकास वैभव जैसे कर्तव्यनिष्ठ और तेज-तर्रार अधिकारी कमान संभाल रहे हैं, तब तक न्याय की उम्मीद पूरी तरह जिंदा है।







