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विशेष रिपोर्ट: डिजिटल इंडिया में ‘अंगूठे’ की सेंधमारी? बिना घर से निकले 8 साल की बच्ची ने 8 किमी दूर ‘निकाला’ राशन

On: Saturday, February 14, 2026 3:40 PM

मोहनपुर: बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला गया जिले के मोहनपुर प्रखंड का है, जहाँ तकनीक और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर गरीबों के निवाले पर डाका डाला जा रहा है। मामला इतना पेचीदा है कि एक फतेहपुर प्रखंड क्षेत्र के रहने वाली 8 साल की बच्ची, जो घर से बाहर तक नहीं गई, उसने 8 किलोमीटर दूर मोहनपुर प्रखंड जाकर पॉस (PoS) मशीन पर अंगूठा लगाकर राशन उठा लिया—कम से कम सरकारी रिकॉर्ड तो यही कह रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

राशन कार्ड और आधार का विवरण जिसके अंगूठा सत्यापन से अनाज निकाला गया

फतेहपुर प्रखंड के रघवाचक गांव की निवासी मुन्नी देवी (राशन कार्ड संख्या: 10340220139006110015) पिछले कई सालों से अपने गांव के डीलर से राशन ले रही थीं। जनवरी माह में जब वह राशन लेने पहुँचीं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। डीलर ने बताया कि उनका राशन पहले ही उठाया जा चुका है।

डीलर के pos 🆔 और जिस बच्ची के फिंगर प्रिंट सत्यापन से अनाज निकला

जब मामले की पड़ताल की गई तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • रिकॉर्ड के अनुसार: राशन का उठाव मशीन संख्या 123800200152 से हुआ है।
  • सत्यापन: परिवार की सदस्य स्वीटी कुमारी (आधार के अंतिम चार अंक: 2730) के अंगूठे के निशान से ट्रांजेक्शन सफल दिखाया गया है।
  • लोकेशन: यह मशीन गया जिले के ही मोहनपुर प्रखंड के अमकोला गांव के डीलर सुरेंद्र कुमार की है, जो मुन्नी देवी के घर से करीब 8 किलोमीटर दूर है।

पीड़ित लाभुक मुन्नी देवी ने बताया कि मेरी बेटी स्वीटी मात्र 8 साल की है। वह कभी घर से बाहर अकेले नहीं जाती, तो 8 किलोमीटर दूर जाकर अंगूठा कैसे लगा सकती है? यह सरासर धोखाधड़ी है।

बड़े घोटाले की आहट?

यह कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ लाभुक दूसरे राज्य में नौकरी कर रहा है, पर बिहार में उसका राशन ‘अंगूठा लगकर’ उठ गया। इंसान मर चुका है, लेकिन सिस्टम में उसका अंगूठा ‘सजीव’ होकर राशन निकाल रहा है। मशीन कहीं और है और लाभुक कहीं और, फिर भी सत्यापन सफल हो रहा है।

सवाल जो जवाब मांगते हैं:

क्या बिना बायोमेट्रिक क्लोनिंग या सिस्टम हैकिंग के यह संभव है?
क्या कुछ डीलरों और विभागीय मिलीभगत से ‘रिमोट एक्सेस’ के जरिए फर्जी उठाव हो रहा है?
अगर गरीब की शिकायत पर अधिकारी जांच के बजाय पल्ला झाड़ रहे हैं, तो जवाबदेही किसकी है?

हैरानी की बात यह है कि मुन्नी देवी न्याय के लिए कई अधिकारियों के पास गई , लेकिन उन्हें कहीं से मदद नहीं मिली। जब हमारे संवाददाता ने इस मामले पर मोहनपुर की प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी शशिकला कुमारी से संपर्क किया, तो उनका जवाब टालमटोल वाला रहा।
उन्होंने पहले तो सिरे से नकार दिया कि बिना अंगूठा लगाए राशन का उठाव संभव है। लेकिन जब उन्हें याद दिलाया गया कि गया के ही बेलागंज और अन्य इलाकों में ऐसे सैकड़ों मामले (जहाँ मृत या प्रदेश में रहने वाले लोगों के नाम पर राशन उठा लिया गया) सामने आए हैं, तो उन्होंने “मैं देखती हूँ” कहकर फोन काट दिया।

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