नयन भरे जल प्रियतम के,
बादल भरे जल वारि।
ख़्याल भरे कजरारे नैना,
विरह सहे सुकुमारी।l
झुकी पलक पर यादों का पहरा,
साँसें जैसे थमी हुई हैं।
धड़कन में है नाम तुम्हारा,
आँखें तुम पर थमी हुई हैं।
जैसे प्यासी चातकी कोई,
बैठी आस लगाये भारी। ।
नयन भरे जल प्रियतम के,
बादल भरे जल वारि।
तपते मन पर सुलग रही है,
ये सावन की ठंडी रातें।
मौन अधर अब पूछ रहे हैं,
कहाँ गई वो मीठी मीठी बातें?
सुध-बुध खोकर रस्ता देखे,
प्रेम-नगर की ये दिलहारी। ।
नयन भरे जल प्रियतम के,
बादल भरे जल वारि।
चंदा को भी देख के सोचूँ,
क्या तुम भी हो जागे-जागे?
टूटे बंधन सब दुनिया के,
जुड़े हृदय के रेशम धागे।
अब तो लौट के आ जाओ तुम,
हार गई ये जीतन-हारी।।
नयन भरे जल प्रियतम के,
बादल भरे जल वारि।
ख़्याल भरे कजरारे नैना,
विरह सहे सुकुमारी।
– उदयेन्द्र भारती , गुरीसर्वे, फतेहपुर (गया)








