भागलपुर (कहलगांव) | मगध लाइव डेस्क
आज के दौर में जहां तथाकथित संतों और धर्मगुरुओं की बाढ़ आई हुई है, जो अक्सर अपने निजी ऐश्वर्य और धन संचय में लगे रहते हैं, वहीं एक ऐसी संत भी है जो ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के प्राचीन भारतीय आदर्श को हकीकत में चरितार्थ कर रही है। वर्षों से जेल में बंद संत रामपाल जी महाराज, जिन्हें उनके अनुयायी साक्षात भगवान का रूप मानते हैं, उनके मार्गदर्शन में चल रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने भागलपुर के कहलगांव प्रखंड अंतर्गत रामपुर खड़हरा गांव में मानवता की एक ऐसी बेमिसाल इबादत लिखी है, जिसे देख इलाका दंग है।
हादसे ने छीनी थी खुशियां, बेबसी के साये में था परिवार
कहानी कृष्णा यादव की है, जो करीब एक साल पहले एक दर्दनाक ट्रेन हादसे में अपना पैर गंवा बैठे थे। परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य बिस्तर पर क्या गिरा, सात सदस्यों के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बूढ़ी मां, पत्नी और चार मासूम बच्चों के सामने भूख का संकट खड़ा हो गया। रहने के लिए एक जर्जर झोपड़ी थी जिसकी छत से पानी टपकता था और जहां सुरक्षा का नामोनिशान नहीं था।
जेल से आया आदेश: ‘मेरे सुदामा के लिए महल बनाओ’
जब इस परिवार की कारुणिक स्थिति की जानकारी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उन्होंने तत्काल इस परिवार को गोद लेने का निर्देश दिया। राज्य सेवादार नागेंद्र दास ने बताया, “गुरुदेव के आदेशानुसार हम पिछले 7 महीनों से इस परिवार को हर महीने राशन, कपड़े और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचा रहे थे। लेकिन उनकी झोपड़ी इतनी असुरक्षित थी कि किसी भी दिन गिर सकती थी। इसीलिए गुरुदेव ने तत्काल एक पक्का और सुरक्षित घर बनाने का आदेश दिया। यह मदद यहीं नहीं रुकेगी, परिवार को ताउम्र राशन और जरूरी सामान मिलता रहेगा।”
तकनीक और सुविधाओं से लैस हैं ‘समर्थ कबीर के सुदामा का महल ‘
यह मकान मात्र ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि अत्याधुनिक सुविधाओं का भंडार है:
- कूलिंग रूफ तकनीक: घर की छत को विशेष वैज्ञानिक तकनीक से बनाया गया है, जो भीषण गर्मियों में भी कमरों को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखती है।
- अत्याधुनिक फिटिंग: घर में सुरक्षित बिजली वायरिंग, पंखे, पाइप फिटिंग, मोटर और 500 लीटर की पानी टंकी की व्यवस्था है।
- लक्जरी फर्नीचर: परिवार को हैवी क्वालिटी की स्टील आलमारी, 3 मजबूत बेड, आरामदायक गद्दे और रजाई प्रदान की गई है।
- दैनिक जरूरतें: घर के हर सदस्य के लिए दो-दो जोड़ी नए कपड़े, जूते-चप्पल और महीनों का भरपूर राशन उपलब्ध कराया गया है।
चाबी मिलते ही छलक पड़े आंसू, जनप्रतिनिधियों ने बताया ‘ईश्वरीय कार्य’
वह क्षण बेहद भावुक कर देने वाला था जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने संयुक्त रूप से दिव्यांग कृष्णा यादव को इस समर्थ कबीर के सुदामा का महल’ की चाबी सौंपी। चाबी हाथ में लेते ही कृष्णा फफक कर रो पड़े। उन्होंने कहा, “जब मेरा पैर कटा तो मुझे लगा मेरा संसार उजड़ गया, लेकिन आज मुझे महसूस हो रहा है कि भगवान खुद चलकर मेरे घर आए हैं।”
इस ऐतिहासिक मौके पर सरपंच प्रतिनिधि (एकचारी) उपेंद्र नारायण सिंह (75 वर्ष) ने भावुक होकर कहा, “संत रामपाल जी महाराज ने हमारे पंचायत के दिव्यांग कृष्णा यादव के लिए जो महल बनाया है, वह साधारण नहीं बल्कि स्वर्ग जैसा है। मेरी उम्र 75 साल है, मैंने कई धर्मगुरु देखे, लेकिन ऐसा निस्वार्थ कार्य आज तक नहीं देखा। महाराज जी साक्षात भगवान हैं। उन्होंने कहा कि मेरे एक चारी पंचायत और आसपास के क्षेत्र में ऐसा सुंदर ,मजबूत और सुरक्षित एक भी मकान नहीं है। “
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता शेख जाहिद हुसैन ने कहा, “महाराज जी के परोपकार को देखकर लग रहा है कि वे वही ‘आखिरी नबी’ हैं जिनका जिक्र पाक कुरान शरीफ में है। उन्होंने इंसानियत को धर्म से ऊपर रखा है।”
सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में हुआ गृह-प्रवेश
इस पावन अवसर पर दिलीप कुमार मंडल (मुखिया, धनौरा), प्रमोद कुमार मंडल (मुखिया, एकचारी), जिला सेवादार चमक लाल दास, संतोष दास, राज्य सहयोगी सेवादार सुशांत दास, अशोक दास, पंकज दास, कृष्ण दास, अर्जुन दास और छमुड़ी दास सहित सैकड़ों अनुयायी और ग्रामीण मौजूद रहे। लोग इस घर को समर्थ कबीर के सुदामा का महल’ कह रहे हैं, जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से हुजूम उमड़ रहा है।
मगध लाइव इस नेक पहल को सलाम करता है, जो साबित करती है कि सच्ची सेवा की शक्ति सलाखों से भी बड़ी होती है।





