रिपोर्ट: सत्यम कुमार , शेखपुरा संवाददाता
शेखपुरा। जिले के बरबीघा और चेवाड़ा प्रखंडों में संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों द्वारा धार्मिक पुस्तकों का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया। इस अभियान के तहत शिष्यों ने गांव-गांव जाकर तथा शहरों के प्रमुख चौक-चौराहों पर स्टाल लगाकर आध्यात्मिक पुस्तकों को लोगों तक पहुंचाया। कार्यक्रम का उद्देश्य शास्त्रसम्मत ज्ञान को आमजन तक सरल और तथ्यपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करना रहा।
अभियान के दौरान “ज्ञान गंगा”, “गीता तेरा ज्ञान अमृत” सहित अन्य आध्यात्मिक पुस्तकों को लोगों के समक्ष रखा गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इन पुस्तकों को खरीदा और उनमें दी गई शास्त्रीय व्याख्या को पढ़कर गहरी रुचि दिखाई। पाठकों ने बताया कि पुस्तकों में वेद, पुराण और गीता के प्रमाणों के साथ प्रस्तुत ज्ञान ने उन्हें आध्यात्मिक विषयों को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर दिया है।

शिष्यों द्वारा शांत, संयमित और संवादात्मक तरीके से पुस्तकों की विषयवस्तु समझाई गई, जिससे लोगों में जिज्ञासा और विश्वास दोनों बढ़े। कई लोगों ने कहा कि पुस्तकें पढ़ने के बाद वे संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान और विचारों से प्रभावित हुए हैं तथा आगे भी इन ग्रंथों का अध्ययन करना चाहते हैं।
इस मौके पर मौजूद संत जी के एक शिष्य अधीक दास ने जानकारी देते हुए बताया कि दुनिया के सारे धर्म के लोग कहते है कि हम सब का मालिक यानि भगवान एक है। लेकिन वो एक भगवान कौन है ये समझ नहीं पाते। जब सब के सृजनहार एक है तो उस सृजनहार यानि उस भगवान की जानकारी भी सभी धर्मों के किताब में होनी चाहिए। हमारे गुरुदेव उस एक भगवान के बारे में इस ज्ञान गंगा पुस्तक में सारे धर्म के पवित्र धर्म ग्रंथों से प्रमाणित कर बताएं है। ये पुस्तक जीवन को बदलने वाली और सत्य धर्म से परिचित कराने वाली है। उन्होंने कहा कि ये पुस्तके किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि सभी धर्मों के पवित्र धर्म ग्रंथ से प्रमाणित पुस्तक है जिसे सभी लोगों को पढ़नी चाहिए।
कुल मिलाकर, दोनों प्रखंडों में चलाया गया यह पुस्तक प्रचार अभियान न केवल धार्मिक साहित्य के वितरण तक सीमित रहा, बल्कि समाज में विवेकपूर्ण सोच, शास्त्रसम्मत भक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम साबित हुआ।






