Rashan Scam Bihar बिहार में गरीबों को मिलने वाले अनाज पर ‘हाईटेक’ सेंधमारी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम और दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना, जिसे इसलिए लाया गया था कि कोई गरीब भूखा न रहे, अब भ्रष्ट डीलरों के लिए ‘डिजिटल लूट’ का औजार बन गई है।
डेटा का खेल: 98% बाहरी ट्रांजेक्शन, इत्तेफाक या बड़ी साजिश?


मगध लाइव की टीम ने जब बिहार सरकार की AePDS वेबसाइट के आंकड़ों को खंगाला, तो गया जिले के मोहनपुर प्रखंड के एक डीलर (POS ID: 123800200818, नाम: राजेश कुमार) का कच्चा चिट्ठा सामने आया।

- चौंकाने वाला आंकड़ा: 2 दिसंबर 2025 (वितरण माह नवंबर) को इस दुकान पर कुल 130 ट्रांजेक्शन हुए।
- हैरानी की बात: इन 130 में से करीब 98% ट्रांजेक्शन उन राशन कार्डों से हुए जो इस दुकान के हैं ही नहीं।
- सवाल: क्या यह संभव है कि एक ही दिन जिले और प्रखंड के अलग-अलग कोनों से सैकड़ों लाभुक अचानक एक ही दुकान पर राशन लेने पहुँच जाएं?
मुर्दे भी लगा रहे अंगूठा! सिस्टम को चुनौती देती ‘भूतिया’ निकासी
जब हमारी टीम ने गहराई से छानबीन की, तो इस घोटाले का सबसे वीभत्स चेहरा सामने आया। कार्ड संख्या 10340230090019200068 (AAY) की धारक सुकरी देवी की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 2 दिसंबर को उनके ‘अंगूठे के निशान’ (Biometric) से राशन की निकासी दिखाई गई है। बात यही खत्म नहीं होती है, हमारी टीम ने जब इस राशन कार्ड के सभी ट्रांजेक्शन की जांच किया तो इस सिस्टम की एक और पोल खुल गई। बिहार सरकार की AEPDS वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े के अनुसार कार्ड संख्या 10340230090019200068 का जनवरी 2022 से ट्रांजेक्शन डिटेल उपलब्ध है। इस आंकड़े को देखे तो करीब तीन साल तक यानी जनवरी 2022 से मार्च 2025 तक कभी भी राशन का उठाव इस कार्ड से नहीं हुआ।
अचानक मई और जून 2025 महीने में POS 🆔 123900100371 (नवादा जिले के वारसलीगंज प्रखंड के डीलर गनौरी प्रसाद) से दोनों माह का राशन निकाला जाता है। इसके बाद फिर से जुलाई और अगस्त 2025 में नवादा के वारसलीगंज प्रखंड के ही एक डीलर कौशलेंद्र सिंह POS 🆔 123900100388 से दोनों माह का राशन निकाला जाता है। इस राशन कार्ड से अंतिम ट्रांजेक्शन नवंबर 2025 को मोहनपुर प्रखंड के डीलर राजेश कुमार POS 🆔 123800200818 के पास हुआ है।
बड़ा सवाल: जो महिला अब इस दुनिया में नहीं है, उसके बायोमैट्रिक का सत्यापन कैसे हुआ? क्या बायोमैट्रिक डेटा को क्लोन किया जा रहा है या विभाग की मिलीभगत से सॉफ्टवेयर में सेंधमारी की गई है?
प्रवासी मजदूर बाहर, अंगूठा गया में!
जांच में यह भी पाया गया कि जिन लाभुकों के नाम पर राशन निकाला गया, उनमें से कई व्यक्ति घटना के वक्त बिहार से बाहर दूसरे राज्यों में मजदूरी कर रहे थे। मोहनपुर से लेकर फतेहपुर प्रखंड तक फैला यह जाल बताता है कि यह किसी एक डीलर की मनमानी नहीं, बल्कि एक संगठित ‘हाईटेक राशन माफिया’ का काम है।
इस महा-घोटाले पर जब हमारे संवाददाता ने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, मोहनपुर शशिकला कुमारी से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी।
गरीबों की थाली पर सरकारी साठगांठ का डाका?
दो दिन पूर्व भी मोहनपुर के एक डीलर द्वारा फतेहपुर के कार्डधारी का राशन हड़पने की खबर मगध लाइव न्यूज पर प्रकाशित हुई थी। यह साफ है कि गया में राशन वितरण प्रणाली पूरी तरह से माफियाओं के चंगुल में है। अगर एक मृत महिला के नाम पर राशन निकल सकता है, तो फिर इस डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता क्या रह जाती है?
मगध लाइव प्रशासन से मांग करता है कि इस ‘डिजिटल फिंगरप्रिंट क्लोनिंग’ और ‘पॉस (POS) मशीन’ के साथ हो रही छेड़छाड़ की उच्चस्तरीय जांच की जाए, ताकि गरीबों का हक मारने वाले ये सफेदपोश सलाखों के पीछे हों।






